दिल्ली की तीस हजारी ने 17 वर्ष पुराने वाणिज्यिक विवाद का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले की लंबे समय तक चली सुनवाई से विलंबित वाणिज्यिक न्याय की दुर्दशा को दर्शाया है. उसका देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
जिला न्यायाधीश मोनिका सरोहा ने यह बात अप्रैल 2008 में एक कंपनी की जम्मू एंड कश्मीर बैंक लिमिटेड के खिलाफ दाखिल मुकदमे की सुनवाई के दौरान कही है. उसमें ऋण की प्रक्रिया के लिए आवेदन शुल्क या अग्रिम शुल्क के रूप में बैंक को भुगतान किए गए लगभग 17.92 लाख रुपए की वसूली का अनुरोध किया गया था.
अदालत ने कहा कि वादी कंपनी यह साबित करने में विफल रही है कि मूल स्वीकृति पत्र के अनुसार वह आवेदन शुल्क की वापसी की हकदार थी. बैंक ऋण आवेदन पर कार्रवाई करने और महत्वपूर्ण प्रयास करने के एवज में मूल लिखित शर्ते के अनुसार आवेदन शुल्क को रखने का हकदार है.
अदालत ने कहा कि मुकदमे में तय किए जाने वाले मुद्दों के वाद दाखिल किए जाने के कुछ महीनों के भीतर ही निपटारे योग्य होने के बावजूद बार-बार स्थगन, विविध आवेदन दाखिल करने, वादी द्वारा बार-बार वकील बदलने और अन्य कारणों से.मुकदमा लंबा खिंच गया.
वाणिज्यिक मामलों के निर्णय में इस तरह की देरी हितधारकों के विश्वास को कम करता है और अर्थव्यवस्था के विकास को बाधित करती है.
ये भी पढ़ें: आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा सहित अन्य को कोर्ट ने SC/ST के आरोपों से किया बरी
-भारत एक्सप्रेस
Kedarnath Waste Crisis 2026: केदारनाथ में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 50.30 मीट्रिक टन…
Nagaland Spurious Liquor Deaths: साल 1990 से पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य नागालैंड में मिलावटी और…
Kab Hai Sarva Pitru Amavasya: पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है.वर्ष…
Manmohan Singh Birth Anniversary Tributes: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र…
Triple Talaq Law: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि…
मथुरा-वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण…