आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा हम बदलाव की लहर पैदा करना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली की जनता को जागरूक करना चाहते हैं. यह टिप्पणी जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की बेंच ने की है.
कोर्ट ने एनडीएमसी और एमसीडी को निर्देश दिया है कि लखनऊ नगर निगम से ताल मेल बिठाकर जल्द से जल्द ट्रेनिंग आयोजित करें. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एमसीडी की ओर से पेश वकील से पूछा कि क्या दो महीने में एक वार्ड का काम भी पूरा नहीं हुआ? आप 250 वार्डों का काम कब करेंगे? इस रफ्तार को बढ़ाना होगा. सुप्रीम कोर्ट दौरान एमिकस क्यूरी गौरी मुलेखी ने कोर्ट को बताया कि 14 एबीसी सेंटर हैं. एमिकस क्यूरी ने कहा कि 2 या 3 और सेंटर जोड़े जा सकते है और ट्रेनिंग से इस प्रक्रिया में मदद मिलेगी.
एमसीडी के स्टैंडिंग काउंसिल मनु चतुर्वेदी ने कहा कि हम फीडर्स को भी शामिल कर रहे है. अगली तारीख तक हम आनंद विहार वार्ड का काम पूरा कर सकते है और उसे रेबीज-मुक्त घोषित कर सकते है. हाई कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों से पूछा कि किस सेंटर के तहत किन वार्डो को रेबीज मुक्त बनाया जाए.
हाई कोर्ट ने उन चार वार्डो के नाम बताने को कहा, जिनसे शुरुआत की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया को कैसे बढ़ाया या तेज किया जाए. इसपर सुझाव लेकर आए. कोर्ट ने कहा कि हम बस एक हलचल पैदा करना चाहते है. हम दिल्ली की जनता को जागरूक करना चाहते है. एक बार जब यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और दिल्ली के निवासियों को पता चलेगा, तो यह एक आंदोलन का रूप ले सकता है. लोग खुद कुत्तों को सेंटर तक लाएंगे.
मामले की सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने बंदरो की समस्या का मुद्दा उठाया.कोर्ट ने कहा पहले कुत्तों की समस्या से निपट लें. कोर्ट ने कहा कल कोई चूहों की समस्या लेकर आएगा, कोई बिल्लियों की समस्या लेकर आएगा. ऐसी बहुत समस्या है. एमसीडी और एनडीएमसी के अधिकारियों ने कोर्ट को नसबंदी की प्रक्रिया तेज करने का भरोसा दिया है.
कोर्ट ने इसको लेकर रोड़ मैप तैयार करने को कहा है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों को लेकर जारी निर्देशों का संबंधित अधिकारी सख्ती से पालन नही कर रहे है. जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. दायर याचिका में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है.
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)की धारा 325 से जुड़ा है, जिसमें किसी जानवर को मारने, जहर देने, अपंग करने या उसे बेकार करने जैसे कृत्यों को गंभीर अपराध बनाया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि आरोपी ने कथित तौर पर आवारा कुत्ते से खुद को बचाने के लिए खिलौना बंदूक का इस्तेमाल किया था. वकील का कहना था कि कुत्ते को न तो मारा गया, न जहर दिया गया और न ही उसे किसी तरह अपंग किया गया. ऐसे में बीएनएस कई धारा 325 के तहत अपराध बनता ही नही.
इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि आवारा कुत्तों के जन्म नियंत्रण (एबीसी), नसबंदी और टीकाकरण को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. अदालत ने यह भी पूछा था कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश के बाद राजधानी दिल्ली में अभी तक कितने डॉग पॉइंट और डॉग शेल्टर बनाए गए हैं? इसपर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस दिशा में काम चल रहा है.
इसपर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या बहुत अधिक है. कोर्ट ने यहां तक कहा था कि हाई कोर्ट परिसर में भी बड़ी संख्या में कॉलर पहने भारतीय नस्ल के कुत्ते दिखाई देते है और यह स्पष्ट नही है कि वे पालतू हैं या नही. अदालत ने यह भी कहा था कि समाज में एक ओर पशु प्रेमी है तो दूसरी ओर आम लोग हैं, जो आवारा कुत्तों की समस्या से परेशान हैं.
ये भी पढ़ें- मणिपुर यौन हिंसा मामला में सुप्रीम कोर्ट ने दिए ट्रायल में तेजी लाने के निर्देश
-भारत एक्सप्रेस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को भारत की समृद्ध विरासत और…
सोशल मीडिया पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के नाम से एक…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी…
रामनाथ गोयनका भारतीय पत्रकारिता के उन चुनिंदा नामों में हैं, जिन्होंने प्रेस की आजादी को…
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार नीरज कुमार ने अपना नामांकन…
मणिपुर यौन हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और CBI को पीड़ित गवाहों…