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वकील राकेश सैनी ने वांगचुक को जबरन लिक्विड डाइट देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से लगाई गुहार; 16 जुलाई को सुनवाई

अदालत में यह याचिका वरिष्ठ वकील राकेश सैनी की ओर से सोनम वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि पिछले कई दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर रहने के चलते वांगचुक की तबीयत लगातार बेहद नाजुक होती जा रही है. उनके जीवन को इस समय गंभीर और सीधा खतरा बना हुआ है, लेकिन सरकारों ने अब तक उनकी सुध लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

दायर याचिका में हाई कोर्ट से विशेष मांग की गई है कि वह केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को यह सख्त निर्देश जारी करे कि सोनम वांगचुक को तुरंत उच्चतम स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा (मेडिकल केयर) उपलब्ध कराई जाए. इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने यह भी गुहार लगाई है कि यदि उनकी मेडिकल स्थिति और ज्यादा बिगड़ती है, तो डॉक्टरों की देखरेख में जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन ‘लिक्विड डाइट’ (तरल आहार) या ग्लूकोज उपलब्ध कराया जाए.

कैसी है सोनम वांगचुक की सेहत?

याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को झकझोरते हुए बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की बेरुखी के कारण वे पूरे देश के सामने एक तरह से आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं. याचिका के आधिकारिक दस्तावेजों में स्पष्ट किया गया है कि लगातार अनशन के चलते वांगचुक का वजन अब तक करीब 8.5 किलोग्राम (साढ़े आठ किलो) कम हो चुका है.

डॉक्टरों के अनुसार, यदि यह अनशन इसी तरह जारी रहा, तो अगले दो दिनों के भीतर उनकी जान को अपूरणीय और गंभीर खतरा हो सकता है. याचिका में भावुक दलील देते हुए कहा गया है कि यदि वांगचुक जैसी वैश्विक शख्सियत की इस तरह मौत हो जाती है, तो यह हमारे पूरे देश के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी दुनिया के सामने एक बेहद शर्म की बात होगी.

28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, सोनम वांगचुक पिछले 28 जून 2026 से दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर डटे हुए हैं. उन्होंने यह देशव्यापी अनशन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुए कथित प्रश्नपत्र लीक (पेपर लीक) और परीक्षाओं में सामने आईं अन्य गंभीर अनियमितताओं के कड़े विरोध में शुरू किया है. उनकी मुख्य मांग है कि इन सभी संस्थागत विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें.

ये भी पढ़ें: ‘बंद कमरे’ का सीक्रेट! नरोत्तम, आशुतोष छूटे, दतिया उपचुनाव में कांग्रेसी अवधेश नायक क्यों बने BJP के केंद्र?

यह पूरा प्रदर्शन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले देश भर में चल रहे एक व्यापक जन आंदोलन का हिस्सा है. इस राजनीतिक/सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता और छात्र पिछले 20 जून 2026 से ही दिल्ली की सड़कों पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की एक सूत्रीय मांग को लेकर लगातार उग्र लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं.

गोपाल कृष्ण

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