दिल्ली हाईकोर्ट.
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्नातकोत्तर (पीजी) पाठय़क्रमों में नामांकन के लिए आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) 2025 की प्रोविजनल उत्तर पर आपत्ति उठाने के लिए प्रति प्रश्न एक हजार रुपए की अत्यधिक राशि वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई. यह परीक्षा राष्ट्रीय विधि विविद्यालयों के संघ (एनएलयू) ने आयोजित की थी.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि कई आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्र परीक्षा देते हैं. यह राशि किसी के लिए मासिक आय हो सकती है. आप प्रश्नों को चुनौती देने के लिए प्रति प्रश्न एक हजार रुपए को कैसे उचित ठहरा सकते हैं? सभी प्रकार के लोग परीक्षा दे रहे हैं. यह उन्हें पूछने से रोकने जैसा है. जबकि आप सभी पृष्ठभूमि वाले छात्रों के प्रति जवाबदेह हैं. ऐसा किया जाना ज्यादती है.
कोर्ट 1 दिसंबर, 2024 को आयोजित स्नातकोत्तर (पीजी) पाठय़क्रम के लिए आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) 2025 के त्रुटियों को चुनौती देने वाले मामलों की सुनवाई कर रही है. दो अभ्यर्थियों के वकील सिद्धार्थ आर. गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि किसी भी अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नों पर आपत्ति उठाने के लिए इतना अधिक पंजीकरण शुल्क और राशि नहीं ली जाती है. एनएलयू पंजीकरण शुल्क के रूप में चार हजार रुपए ले रहे हैं. यह उसके कमाई का दुधारू गाय नहीं हो सकता है.
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