पूर्व SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच. (फाइल फोटो)
भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल ने बुधवार (28 मई) को हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ अनुचित व्यवहार और हितों के टकराव के आरोपों का निपटारा कर दिया. उन्होंने आरोपों को “अनुमान और धारणाएं” करार दिया, जिसको सत्यापित नहीं किया जा सका.
लोकपाल ने कहा कि पिछले साल दर्ज की गई टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायत सहित सभी शिकायतें मूल रूप से “एक ज्ञात शॉर्ट सेलर ट्रेडर की रिपोर्ट पर आधारित थीं, जिसका ध्यान अदाणी ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ को बेनकाब या घेरना था”.
10 अगस्त, 2024 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया कि बुच और उनके पति के पास अदाणी ग्रुप से जुड़े कथित मनी-साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी थी. उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि शॉर्ट-सेलर पूंजी बाजार नियामक की विश्वसनीयता पर हमला कर चरित्र हनन का प्रयास कर रहा था.
वहीं अदाणी समूह ने भी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा सार्वजनिक सूचनाओं में हेरफेर करार दिया था.
लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय पीठ ने आदेश में कहा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप अनुमानों और मान्यताओं पर आधारित हैं. इनके एवज में किसी भी तरह के सबूत नहीं है. ऐसे में इन आरोपों पर किसी भी तरह की जांच का निर्देश नहीं दिया जा सकता.
2 मार्च, 2022 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के प्रमुख के रूप में पदभार संभालने वाली बुच ने अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद इस साल 28 फरवरी को पद छोड़ दिया. इस संबंध में पहले के आदेश का हवाला देते हुए लोकपाल ने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट को बुच के खिलाफ कार्रवाई बढ़ाने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता.
लोकपाल के आदेश में कहा गया है, “शिकायतकर्ताओं ने इस स्थिति के प्रति सचेत रहते हुए, कथित रिपोर्ट से स्वतंत्र होकर आरोपों को स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन हमारे द्वारा आरोपों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला कि वे अपुष्ट, निराधार और तुच्छ हैं.”
लोकपाल ने पिछले साल 8 नवंबर को सांसद मोइत्रा और दो अन्य द्वारा दायर शिकायतों पर बुच से “स्पष्टीकरण” मांगा था. SEBI की पूर्व अध्यक्ष बुच को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने के लिए कहा गया था. बुच ने 7 दिसंबर, 2024 को शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल किया था, जिसमें प्रारंभिक मुद्दों को उठाया गया था और साथ ही आरोप-वार स्पष्टीकरण भी दिया गया था.
लोकपाल ने पिछले साल 19 दिसंबर को बुच और शिकायतकर्ताओं दोनों को शिकायतों या हलफनामे में अपना रुख स्पष्ट करने के लिए मौखिक सुनवाई का अवसर देने का फैसला किया था. हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक ने इस साल जनवरी में इसके बंद होने की घोषणा की.
इस बीच आगे के दस्तावेज और हलफनामे-सह-लिखित प्रस्तुतियां दाखिल होने के बाद, लोकपाल ने 9 अप्रैल को मौखिक बहस के लिए मामला अपने पास ले लिया. दूसरी शिकायत में शिकायतकर्ता के वकील ने विस्तृत मौखिक प्रस्तुतियां कीं. तीसरी शिकायत में शिकायतकर्ता की ओर से पेश प्रॉक्सी वकील ने लिखित प्रस्तुतियां दाखिल करने का विकल्प चुना.
आदेश में कहा गया कि तीसरी शिकायत में शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व एक वकील द्वारा किया गया है, लेकिन न तो शिकायतकर्ता और न ही वकील मौखिक प्रस्तुतियां देने के लिए उपस्थित हुए.
बुच का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील ने किया. मौखिक बहस के समापन पर पक्षों को उनके अनुरोध के अनुसार पीठ के विचार के लिए लिखित नोट/प्रतिक्रिया दाखिल करने का समय दिया गया. आदेश में कहा गया कि मौखिक प्रस्तुतियों के समय, शिकायतकर्ताओं ने बुच पर अनुचित लाभ उठाने के आरोप पर मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 11 का हवाला दिया है.
लोकपाल ने आदेश में उल्लेख किया कि मौखिक बहस के दौरान और शिकायतकर्ताओं द्वारा लिखित नोट/प्रस्तुतियों में पाँच आरोपों पर जोर दिया गया है और उन्हें अंतिम रूप से निपटाने से पहले अपने आदेश में विस्तार से बताया.
ये भी पढ़ें: रेप के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत, कहा-‘पीड़िता बच्ची नहीं है और एक हाथ से ताली नहीं बजती’
-भारत एक्सप्रेस
UP News: अयोध्या के सैन्य छावनी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी से हड़कंप मचा है.…
Kanpur digital arrest cyber fraud: कानपुर में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 48.20 लाख रुपये…
सौरभ राजपूत मर्डर केस में दोषी करार होने के बाद मुस्कान ने अपनी बेटी पिहू…
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर सिक्योरिटी और नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर…
UP News: ज्ञानपुर विधानसभा में विकास कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. विधायक…
पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा फेरबदल. राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया बायो में…