दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला बम ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद सभी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि को आगामी 13 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है. अब कोर्ट 13 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दायर की गई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट पर विस्तार से विचार किया जाएगा. एनआईए ने इस धमाके में जान गंवाने वाले लोगों के शरीर के अंगों से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में दायर की है.
इससे पहले, एनआईए ने डॉक्टर शाहीन सईद और अन्य समेत 13 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल की थी. इन आरोपियों में एक फरार पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) भी शामिल है, जिसकी पहचान एक सक्रिय आतंकी मॉड्यूल के संस्थापक सदस्य के रूप में हुई है. एनआईए द्वारा दाखिल इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में मुख्य रूप से जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट और फरार मुजफ्फर अहमद (उर्फ फरार उर्फ जफर) को आरोपी बनाया गया है. ये सभी आरोपी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं. इनमें मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी भी शामिल है, जो विस्फोटक से भरी कार का ड्राइवर था और धमाके के दौरान मौके पर ही मारा गया था.
एनआईए की जांच के मुताबिक, फरार पीडियाट्रिशियन मुजफ्फर अहमद दरअसल सह-आरोपी डॉक्टर आदिल अहमद राथर का सगा बड़ा भाई है और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) का संस्थापक सदस्य है. यह आतंकी संगठन सीधे तौर पर वैश्विक आतंकी नेटवर्क अल कायदा से जुड़ा हुआ है.
जांच में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुई एक अत्यंत गुप्त बैठक में ‘AGuH Interim’ नाम के इस खतरनाक आतंकी मॉड्यूल की नींव रखी गई थी. इस बैठक में शामिल मुजफ्फर हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में चल रही एक सीक्रेट आईईडी (IED) बनाने वाली जगह से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था. यहाँ डॉक्टर उमर और मुज्जमिल की मदद से टीएटीपी (TATP) आधारित बेहद शक्तिशाली विस्फोटक तैयार करने, उसकी टेस्टिंग करने और उसे सुरक्षित रखने का काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था.
एनआईए द्वारा अदालत में दाखिल की गई करीब 7500 पन्नों की इस भारी-भरकम चार्जशीट में बम ब्लास्ट को अंजाम देने वाले मृतक उमर उन नबी को भी नामजद आरोपी बनाया गया है. एनआईए के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर हुए इस भीषण कार बम विस्फोट की पूरी साजिश उमर उन नबी ने ही रची थी, जिसकी मौके पर ही धमाके में मौत हो गई थी.
इस मामले में एनआईए ने एक अन्य आरोपी दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था. एनआईए के मुताबिक, दानिश ने हमले के लिए ड्रोन (Drone) में कई तकनीकी बदलाव किए थे और कार बम विस्फोट को अंजाम देने से पहले उसने रॉकेट तैयार करने की भी नाकाम कोशिश की थी.
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जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल का एक अन्य आरोपी तुफैल, प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का पूर्व ओजीडब्ल्यू (Over Ground Worker) था, जो इस पूरे मॉड्यूल के लिए अवैध हथियारों की सप्लाई का काम करता था. उसने एक सीमा पार हैंडलर के जरिए ‘डेड ड्रॉप्स’ (गुप्त रूप से सामान छोड़ने की जगह) से एक एके-47 (AK-47), एक क्रींकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस हासिल किए थे. इसके साथ ही उसने मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (मृतक) को आतंकी गतिविधियों के लिए ₹3 लाख रुपये की नकद रकम भी पहुंचाई थी. गौरतलब है कि लाल किले के बाहर हुए इस आत्मघाती कार बम ब्लास्ट में कुल 13 मासूम लोगों की जान चली गई थी.
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