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रिज क्षेत्र में पेड़ कटाई मामला: उपराज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत, DDA पर ₹25,000 जुर्माना

रिज इलाको में रोक के बाद पेड़ो की कटाई के मामले में डीडीए के अध्यक्ष (उपराज्यपाल) को अवमानना मामले में राहत मिल गई है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने डीडीए को अवमानना का दोषी ठहराते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. हालांकि कोर्ट ने कहा कि पेड़ों की यह कटाई अर्धसैनिक बलों के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक सड़क चौड़ी करने के उद्देश्य से की गई थी, जो प्रशासनिक गलत निर्णय की श्रेणी में आता है.

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि दिल्ली रिज में पेड़ों की कटाई पर अवमानना को गंभीरता से देखने की जरूरत है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि क्या पेडों को अर्धसैनिक बल के जवानों के लिए अस्पताल तक सड़क को चौड़ा करने के लिए काटा गया था.

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए हुई थी पेड़ों की कटाई

इससे पहले कोर्ट ने डीडीए अध्यक्ष को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि क्या पेड़ों की कटाई की अनुमति पर चर्चा के बारे में कोई जानकारी थी, उपराज्यपाल को कब सूचित किया गया कि अनुमति की आवश्यकता है, तीसरा सुधारात्मक उपायों के रूप में क्या कदम उठाए गए, और चौथा रिज की मूल प्रकृति को संरक्षित करने के लिए (कोर्ट के) आदेश के बाद से दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और डीडीए के उपाध्यक्ष सुभाशीष पांडा से हलफनामा देने को कहा था. साथ ही कोर्ट ने इस मामले से संबंधित असली दस्तावेज तलब किया था. कोर्ट ने उपराज्यपाल द्वारा दिए गए हलफनामे में कही गई बातों पर शक जाहिर किया था.

उपराज्यपाल से मांगा गया था हलफनामा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल ने हलफनामे में जो बातें कही है उसपर हमे शक है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल बी. के सक्सेना ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि उन्हें नही पता था कि राजधानी के रिज क्षेत्र में पेडों की कटाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की आवश्यकता है.

उपराज्यपाल ने कहा था कि निर्माणाधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, आयुर्विज्ञान संस्थान तक सड़क को चौड़ा करने के लिए राजधानी के रिज क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क पर पेड़ो की कटाई के लिए अदालत की अनुमति लेने की आवश्यकता के बारे में उन्हें तीन फरवरी को साइट के दौरे के अवगत नही कराया गया था. यह अवमानना याचिका दिल्ली की रहने वाली बिंदु कपूरिया द्वारा दायर की गई थी.अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के अनुमति के बिना रिज में लगभग 1100 पेड़ काट दिए गए.

यह एमसी मेहता मामले में मई 1996 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है. लिहाजा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट के अवमानना चलाया जाए. छतरपुर से सार्क विश्वविद्यालय और मैदान गढ़ी और सतबरी इलाकों में अन्य प्रतिष्ठानों तक 10 किलोमीटर लंबी सड़को के निर्माण का काम चल रहा है, जिसके चलते 1100 पेडों को काट दिया गया.

ये भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत बरकरार, SIT जांच रहेगी सीमित

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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