ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर को मिली अंतरिम राहत को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने एसआईटी से जांच का दायरा सीमित रखने को कहा है. कोर्ट जुलाई में इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हर चीजपर बारीकी से नजर रखे हुए है, जुलाई में आप बताना.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया है इस मामले में एसआईटी की जांच का गठन कर दिया गया है. जिसपर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मानवाधिकार ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है. सिब्बल ने आशंका जाहिर की कि इसी बहाने एसआईटी पता नहीं और क्या-क्या जांच करेगी. इसपर कोर्ट ने एसआईटी से साफ कर दिया है कि वो सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े विवाद की जांच करेगी. कोर्ट ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट कोर्ट में जमा होगी.
डीजीपी को एसआईटी के गठन का आदेश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी को जांच के लिए एक तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन का आदेश दिया था. कोर्ट ने डीजीपी से 24 घंटे के भीतर एसआईटी के गठन का आदेश दिया था. जिसमें तीन आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे. जो हरियाणा या दिल्ली से न हो. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एसआईटी में एक महिला अधिकारी को शामिल किया जाए.
कोर्ट ने कहा था कि दो कथित आपत्तिजनक पोस्ट की सामग्री को देखते हुए जांच पर रोक लगाने की आवश्यकता नही है. एक निजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था. अली के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. एक जठेड़ी गांव के सरपंच एवं भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य योगेश जठेड़ी ने राई थाने में दर्ज कराई है. जबकि दूसरी राज्य महिला आयोग की तरफ से डीजीपी को शिकायत दी गई थी.
महिला अधिकारियों के अपमान का आरोप
राज्य महिला आयोग ने मध्य प्रदेश में एक मंत्री के खिलाफ हाई कोर्ट के टिप्पणी का हवाला देकर महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी. महिला आयोग ने अली खान द्वारा की गई टिप्पणी को स्वतः संज्ञान लेते हुए सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर को 48 घंटे में दफ्तर में पेश होने को कहा था. महमूदाबाद ने दोनों सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ सेना के नियमों पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
अली खान ने सोशल मीडिया पर ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित टिप्पणी करते हुए महिला सैन्य अधिकारियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की भूमिका को नकरात्मक रूप से प्रस्तुत किया. राज्य महिला आयोग का कहना था कि उनके बयानों में नरसंहार, अमानवीयता और पाखंड जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए भारतीय सेना एवं सरकार की मंशा पर साम्प्रदायिक दुर्भावना से प्रेरित आरोप लगाए गए.
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-भारत एक्सप्रेस
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