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दोषी सांसदों-विधायकों को आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की अपील

Criminal Conviction MPs MLAs: आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए सांसदों-विधायकों को आजीवन अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और एमिकस क्यूरी विजय हंसरिया ने कहा यह गंभीर चिंता का विषय है, समय-समय पर आदेश पारित किया गया है. फरवरी में तीन जजों की बेंच के सामने सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था. कृपया इसे किसी सुविधाजनक तारीख पर सूचीबद्ध करें. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले में सीजेआई बीआर गवई के पास भेज दिया है.

इससे पहले तीन जजों की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक सरकारी कर्मचारी रेप या हत्या के मामले में दोषी करार दिया जाता है तो उसकी नौकरी चली जाती है और उसे वापस नही मिलती है, लेकिन एमपी/एमएलए को दोषी करार दिया जाता है तो चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए प्रतिबंध लगाया जाता है. उसके बाद दोबारा चुनाव लड़ कर सांसद या विधायक बन सकता है, मंत्री बन सकता है. इसलिए जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 और 9 को जांच करना पड़ेगा.

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी याचिका

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील और बीजेपी नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है. जिस याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने सलाह दिया था कि सजायाफ्ता नेताओं को जीवन भर चुनाव नहीं लड़ने देना चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि आरपीए की धारा 8 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाले नेता को गलत रियायत दी गई है. ऐसा सजायाफ्ता नेता अपनी सजा पूरी करने के 6 साल बाद चुनाव लड़ने के योग्य हो जाता है. इस धारा को असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए. एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश के दूसरे राज्यों में बार-बार सुनवाई टाल दी जाती है और सुनवाई टालने के कारण भी नहीं बताया जाता.

इसपर कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि बहुत से ऐसे राज्य है जहां अबतक एमपी/एमएलए कोर्ट गठित नही की गई है.विजय हंसारिया ने कोर्ट को सुझाव दिया है कि क्या चुनाव आयोग ऐसा नियम नहीं बना सकता कि राजनीतिक पार्टियों गंभीर अपराध में सजा पाए लोगों को पार्टी पदाधिकारी नहीं नियुक्त कर सकती. एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोषी ठहराए जाने के लिए सांसद या विधायक के चुनाव लड़ने पर छह साल की रोक लगती है. छह साल बाद वो फिर से चुनाव लड़ सकता ब. लिहाजा ये संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद पति-पत्नी का विवाद सुलझा, पत्नी को मुंबई फ्लैट और गुजारा भत्ता मिला

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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