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आय से अधिक संपत्ति में केरल पुलिस के पूर्व डीजीपी थाचंकरी को 4 साल की कठोर कैद

केरल पुलिस के पूर्व महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचंकरी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में अदालत ने चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है. कोट्टायम विजिलेंस कोर्ट के न्यायाधीश के.वी. रजनीश ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत थाचंकरी को दोषी ठहराया. अदालत ने उन पर 30.84 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत ने उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित पूजप्पुरा सेंट्रल जेल भेजने का आदेश दिया. थाचंकरी के खिलाफ यह मामला उनकी आय, संपत्ति और खर्च के बीच कथित असमानता की जांच से जुड़ा है.

विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) की एर्नाकुलम स्थित स्पेशल सेल ने उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने का मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान सामने आए वित्तीय विवरणों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि संबंधित अवधि में थाचंकरी की संपत्ति और खर्च उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक थे.

चार साल की सजा के साथ जुर्माना

अदालत ने मामले में दोषसिद्धि के बाद थाचंकरी को चार साल के कठोर कारावास की सजा दी. इसके साथ ही 30.84 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया. अदालत ने सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें पूजप्पुरा सेंट्रल जेल भेजने का निर्देश दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल में यह पहला मामला है, जिसमें डीजीपी रैंक के किसी अधिकारी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी पाए जाने के बाद सजा सुनाई गई है. इस वजह से अदालत का यह फैसला केरल पुलिस के शीर्ष स्तर के अधिकारी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामलों में उल्लेखनीय माना जा रहा है.

2003 से 2007 की अवधि जांच के केंद्र में

मामले की जांच मुख्य रूप से वर्ष 2003 से 2007 के बीच थाचंकरी की आय और संपत्ति से संबंधित विवरणों पर आधारित थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच में पाया गया कि इस अवधि में थाचंकरी ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में 135.80 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की थी, विजिलेंस जांच में उनकी आय और संपत्ति के साथ-साथ उस अवधि के दौरान हुए खर्च का भी परीक्षण किया गया.

अभियोजन के अनुसार, जांच में कुल 64.70 लाख रुपये के खर्च का पता चला, जिसके लिए थाचंकरी आय का कोई स्रोत नहीं बता सके. यही रकम मामले की जांच और अभियोजन की दलीलों में प्रमुख बिंदुओं में शामिल रही, अभियोजन का कहना था कि किसी सरकारी अधिकारी की संपत्ति और खर्च का आकलन उसकी ज्ञात आय के आधार पर किया जाता है. जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक थाचंकरी के मामले में आय और संपत्ति के बीच जो अंतर पाया गया, उसे अभियोजन ने आय से अधिक संपत्ति के आरोप का आधार बनाया.

विजिलेंस की स्पेशल सेल ने दर्ज किया था केस

थाचंकरी के खिलाफ मामला विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो की एर्नाकुलम स्थित स्पेशल सेल ने दर्ज किया था. जांच एजेंसी ने उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की. इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबी सुनवाई चली, मुकदमे के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला. अदालत के समक्ष बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए गए. इससे स्पष्ट है कि मामला केवल संपत्ति के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच में सामने आए विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों और गवाहियों की भी अदालत में पड़ताल हुई.

अभियोजन ने पेश किए 271 दस्तावेज

मुकदमे की कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने 96 गवाहों की जांच कराई. इसके अलावा 271 दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में पेश किए गए. बचाव पक्ष की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखा गया. बचाव पक्ष ने 23 गवाहों की जांच कराई और 55 दस्तावेज रिकॉर्ड में लिए गए, गवाहों और दस्तावेजों की इस लंबी प्रक्रिया के बाद अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया. इसके बाद न्यायाधीश के.वी. रजनीश ने थाचंकरी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया और चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई.

अंतिम सुनवाई में स्वास्थ्य का मुद्दा उठा

सजा पर बहस के दौरान थाचंकरी की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया गया. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि सजा निर्धारित करते समय उनकी सेहत को ध्यान में रखा जाए. उनका यह अनुरोध अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखा गया था, वहीं अभियोजन पक्ष ने सजा में नरमी बरते जाने का विरोध किया. अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि थाचंकरी पुलिस के वरिष्ठ पद पर रह चुके हैं और मामले की प्रकृति को देखते हुए उनके साथ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया. दोषसिद्धि के साथ चार साल के कठोर कारावास और 30.84 लाख रुपये के जुर्माने का आदेश दिया गया. इसके बाद उन्हें पूजप्पुरा सेंट्रल जेल भेजने के निर्देश दिए गए.

आय और खर्च के अंतर पर टिका मामला

पूरे मामले का मूल आधार थाचंकरी की ज्ञात आय और उनके द्वारा अर्जित संपत्ति तथा किए गए खर्च के बीच पाया गया कथित अंतर रहा. अभियोजन के मुताबिक, 2003 से 2007 के बीच संपत्ति में हुई वृद्धि ज्ञात आय से 135.80 प्रतिशत अधिक थी.

इसके अलावा 64.70 लाख रुपये के खर्च का स्रोत भी जांच में स्पष्ट नहीं हो सका, विजिलेंस की ओर से इसी वित्तीय अंतर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा गया. बचाव पक्ष ने भी गवाहों और दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष रखा. अदालत ने पूरी सुनवाई और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि का फैसला सुनाया.

डीजीपी रैंक के अधिकारी को सजा का पहला मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल में यह पहला मामला है जिसमें डीजीपी रैंक के किसी अधिकारी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा मिली है. इस लिहाज से थाचंकरी की दोषसिद्धि राज्य में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, थाचंकरी के खिलाफ मामला दर्ज होने से लेकर अदालत के फैसले तक जांच एजेंसी ने आय, संपत्ति और खर्च से संबंधित रिकॉर्ड जुटाए.

सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 96 गवाहों और 271 दस्तावेजों के माध्यम से अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष ने 23 गवाहों और 55 दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष रखा. अदालत के फैसले के साथ इस मामले में फिलहाल निचली अदालत की सुनवाई का चरण पूरा हुआ है. फैसले के तहत पूर्व डीजीपी को चार साल की कठोर कैद भुगतनी होगी और 30.84 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. अदालत के निर्देश पर उन्हें तिरुवनंतपुरम की पूजप्पुरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस

अतुल यादव (रवि), एडिटर क्राइम

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