सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद पैक्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर एफएसएसएआई ने लिखित जवाब दाखिल किया है. एफएसएसएआई ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि पैक्ड फूड के खतरों को देखते हुए चेतावनी लेबल का पाठ स्कूलों में पढ़ाना चाहता है. उसने अदालत को यह भी बताया है कि इसको लेकर उसने शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध भी किया है.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सभी पक्षों की जिरह के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों से लिखित जवाब देने को कहा था. जिसके बाद एफएसएसएआई ने कोर्ट में यह लिखित जवाब दाखिल किया है. एफएसएसएआई ने शिक्षा मंत्रालय से कहा है कि पाठ्यक्रम में पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल यानी एफओपीएलएल को शामिल किया जाए.
एफएसएसएआई ने कहा है कि शिक्षा मंत्रालय से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट ऑफ पैक लेबल पढ़ने की जानकारी को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने और बच्चों को लेबल समझने के प्रति जागरूक करने का अनुरोध किया गया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एफएफएसएआई ने यह लिखित जवाब हलफनामे के जरिए सौंपा है.
एफएसएज़एआई ने अपने लिखित जवाब में सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि केवल कुल चीनी या कुल वसा को आधार बनाकर चेतावनी तय करने के संबंध में मौजूदा समय में आईसीएमआर-एनआईएन के दिशा निर्देशों में विशिष्ट व्यवस्था नहीं है. साथ ही प्राकृतिक रूप से मौजूद चीनी खाद्य पदार्थों में अलग से जोड़ी गई चीनी के बीच अंतर को ध्यान में रखने की जरूरत भी बताई गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI से कहा था कि हम आपके अब तक के काम और आपकी पहल की तारीख करते हैं, लेकिन जो हम हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुचना चाहते हैं, उसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. अब हम जो आदेश देंगे, वह आप पर लागू होगा और हमें उम्मीद है कि आप इसे समझेंगे और पूरी ईमानदारी से लागू करेंगे. वही FSSAI के नए प्रस्ताव को लागू करने की समय सीमा पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा था कि एक साल तक स्वैच्छिक पालन क्यों? आपको इतना समय क्यों चाहिए? आप सुनवाई और आपत्तियां मांगने की प्रक्रिया फिर से क्यों शुरू करना चाहते हैं? आपने 2022 में शुरुआत की थी, पिछले चार सालों में आपने क्या किया? वकील ने कहा कि हमने 2022 में जो शुरू किया था, वह स्टार रेटिंग सिस्टम था और उसका पैमाना बिल्कुल अगल था. जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि जब हम स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर इतने चिंतिंत है, तो आप इतना समय क्यो बर्बाद करना चाहते हैं?
हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश में पैकेज्ड फूड ऑफ पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग को लागू करने को लेकर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया था. दायर हलफनामे में FSSAI ने स्पष्ट किया था कि वह पहले प्रस्तावित दो चरणों के बजाए अब एक ही चरण में पैकेज्ड फूड ऑफ पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग को लागू करने की योजना बना रहा है, जिसके ड्राफ्ट नियमो और अधिसूचना को अंतिम रूप देने में लगभग 4 महीने का समय लगेगा.
हालांकि 3S and Our Health Society नामक एनजीओ ने FSSAI के इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि मामले को टालने और लटकाने की कोशिश की जा रही है. इस नए फ्रेमवर्क के तहत तय सीमा से ज्यादा नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट वाले पैकेटबंद खाने-पीने के सामान पर सामने की तरफ लाल रंग का चेतावनी निशान लगाना जरूरी होगा.
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस मामले में स्पष्ट समयसीमा मांगे जाने के बाद FSSAI ने यह कदम उठाया है. जिससे देश भर के 100 करोड़ रुपए से ज्यादा उपभोक्ता और हजारों खाद्य कंपनियां प्रभावित होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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