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आइपैक मामले को संविधान पीठ में भेजने की पश्चिम बंगाल सरकार ने की मांग

आइपैक मामले में चल रही सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को पांच जजों के संविधान पीठ के पास भेज दिया जाए.

संविधान की व्याख्या से जुड़ा मामला

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने ईडी की याचिका की वैधता को सवाल उठाते हुए मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की गुहार लगाई है. उन्होंने कहा कि यह मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा हुआ है, खासकर केंद्र-राज्य संबंधों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत परिवर्तन निदेशालय की याचिका को स्वीकार्यता को लेकर.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. 24 मार्च को कोर्ट मामले में अगली सुनवाई करेगा. पश्चिम बंगाल के वकील ने कहा कि मौजूदा कार्यवाही पर दो जजों की पीठ फैसला नहीं दे सकती. क्योंकि इसमें संवैधानिक व्याख्या से जुड़े सवाल है.

कोर्ट से समय देने की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान ईडी द्वारा आइपैक दफ्तर सहित अन्य जगहों पर की जा रही छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने जो किया वह गलत था. कोर्ट ने कहा जो हुआ वह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी. यह असामान्य है.

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने ईडी द्वारा दाखिल जवाब पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय देने की मांग की. जिसका ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सुनवाई टालने के लिए एक चल चला जा रहा है.

कब दाखिल हुआ था हलफनामा?

ईडी द्वारा हलफनामा चार सप्ताह पहले दाखिल किया गया था. उनके पास जवाब दाखिल करने के लिए लंबा समय था. पश्चिम बंगाल सरकार ने दलील दी कि ईडी केंद्र सरकार का एक विभाग है, स्वतंत्र कानूनी इकाई नहीं है और अपने नाम से अदालत में याचिका दायर करने का उसे अधिकार नहीं है.

साथ ही मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा भी वह इस प्रकार नहीं कर सकता, क्योंकि इन अधिकारों की रक्षा स्वयं संघ करता है. इससे पहले ममता बनर्जी ने जवाब दाखिल कर ईडी की ओर से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है. उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि ईडी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.

ED याचिका पर उठाए सवाल

मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है तो समानांतर कार्रवाई नहीं हो सकती. तृणमूल कांग्रेस सरकार का कहना है कि ईडी की याचिका में मेंटनेबिलिटी पर सवाल उठाया है. पुलिस कमिश्नर ने ईडी अधिकारियों की ओर से रिट याचिका दायर करने पर सवाल उठाया है. अपने जवाब में कहा है कि ईडी अधिकारी रिट याचिका दाखिल नहीं कर सकते, उनके नागरिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है.

याचिका को खारिज करने की मांग

दायर हलफनामे में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देकर ईडी के अधिकारियों की ओर से निजी तौर पर दाखिल रिट याचिका को खारिज करने की मांग की है. हलफनामे में कहा गया है कि रेड मारने गए छलावा कर रहे थे, हथियार होने के बावजूद पहचान छिपा रहे थे, ऐसे में क्षेत्रीय पुलिस ने सूचना मिलने के बाद कदम उठाया था.

मुख्यमंत्री मौके पर पहुच गई थी और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर कमिश्नर होने के नाते वहां पहुचा था, यह मेरी जिम्मेदारी और कर्तव्य है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरा सहित अन्य सामग्री को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था.

ये भी पढ़ें: राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 1 अप्रैल तक बरकरार रहेगी अंतरिम जमानत

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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