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जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग केस: आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की जमानत याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ राशिद इंजीनियर की ओर से दायर जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने 29 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने 21 मार्च को सांसद को जमानत देने से इनकार करने के एक निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उनकी अपील पर नोटिस जारी किया है.

राशिद ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को दी चुनौती

राशिद ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को भी चुनौती दी है. मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील ने कहा कि अपील दाखिल करने में 1104 दिनों की देरी हुई, जबकि कानून के अनुसार 90 दिनों से अधिक की देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसपर राशिद के वकील ने कहा कि वे देरी के कारणों को स्पष्ट करेंगे और बताया कि जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े  में कोर्ट 90 दिनों की सीमा को नजरअंदाज कर सकती है.

राशिद इंजीनियर ने लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला को हराया था

राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

पूछताछ के दौरान शेख अब्दुल राशिद का नाम आया था सामने

बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था. पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

-भारत एक्सप्रेस
गोपाल कृष्ण

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