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कपिल सिब्बल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, दलबदल कानून की व्याख्या पर उठेंगे बड़े सवाल

Kapil Sibal anti defection law petition: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. यह याचिका दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या और देश में संसद की बदलती संरचना से जुड़े व्यापक संवैधानिक मुद्दों को लेकर दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 24 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है.

समान मुद्दे वाले मामले के साथ सुनवाई की मांग

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष कपिल सिब्बल ने अपनी याचिका का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इसी तरह का एक अन्य मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिवसेना के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता दी गई थी. सिब्बल ने आग्रह किया कि उनकी याचिका को भी उसी मामले के साथ सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि दोनों मामलों में दलबदल कानून से जुड़े समान कानूनी प्रश्न हैं.

दलबदल कानून की व्याख्या पर उठेगा संवैधानिक सवाल

कपिल सिब्बल की याचिका में केवल किसी एक राजनीतिक दल के मामले तक सीमित मुद्दा नहीं उठाया गया है, बल्कि इसमें संसद की बदलती संरचना और दलबदल विरोधी कानून के प्रभाव को लेकर व्यापक संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं. वहीं, लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ दायर याचिका में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को दी गई मान्यता को चुनौती दी गई है.

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क्या है दलबदल विरोधी कानून?

भारतीय राजनीति में दलबदल का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है. वर्ष 1967 में हरियाणा के विधायक गया लाल द्वारा एक ही दिन में तीन बार दल बदलने के बाद ‘आया राम, गया राम’ वाक्यांश काफी चर्चित हुआ था. राजनीतिक अस्थिरता को रोकने के उद्देश्य से वर्ष 1985 में संविधान के 52वें संशोधन के जरिए दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है.

क्यों लाया गया था कानून?

दलबदल विरोधी कानून का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बार-बार पार्टी बदलने से रोकना था. इसके जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि विधायक और सांसद जिस राजनीतिक दल के टिकट पर चुने गए हैं, उसके प्रति उनकी जवाबदेही और निष्ठा बनी रहे. अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दलबदल कानून की व्याख्या और बदलते राजनीतिक परिदृश्य में इसकी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा.

भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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