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उन्नाव बलात्कार मामला: दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली सेंगर की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के नाबालिग रेप के मामले में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली कुलदीप सेंगर की अपील पर कोर्ट ने तारीख तय कर दी है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 मई, 18 मई, 19 मई और 20 मई की तारीखें सुनवाई के लिए तय की हैं. इससे पहले कोर्ट ने हिरासत में पीड़िता के पिता की हुई मौत के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था. सेंगर ने सजा के निलंबन की मांग करते हुए जमानत की गुहार लगाई थी.

जमानत याचिका खारिज और कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा था कि सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती है. अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील पर शीघ्रता से फैसला किया जाता है, तो यह उनके हित में होगा. अदालत ने नोट किया था कि सेंगर 10 साल की कुल सजा में से लगभग 7.5 साल हिरासत में बिता चुके हैं. इस मामले में दोषसिद्धि के विरुद्ध उनकी अपील पर फैसला होने में देरी हुई है, जिसका आंशिक कारण सेंगर द्वारा कई याचिकाएं दायर करना है.

बलात्कार मामले में आजीवन कारावास और शर्तें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी थी. सेंगर को 15 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के तीन जमानतदार जमा करने का निर्देश दिया था. अदालत ने यह शर्त लगाई थी कि तीनों जमानतदार दिल्ली के निवासी होने चाहिए. कोर्ट की शर्तों के मुताबिक, सेंगर को पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आने और पीड़िता या उनकी मां को किसी तरह की धमकी नहीं देने का आदेश दिया गया था.

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मामले की पृष्ठभूमि और सजा का विवरण

कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप है कि साल 2017 में पीड़िता का अपहरण कर उससे बलात्कार करने का दोष साबित हुआ था; घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी. 13 मार्च 2020 को निचली अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की कठोर सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. निचली अदालत ने फैसला देते हुए कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले की हत्या के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती.

गोपाल कृष्ण

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