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कड़कड़डूमा कोर्ट हमला मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, अस्पतालों पर जताई नाराजगी

कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में वकील मधु पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने नालसा को वित्तीय मदद और दिल्ली पुलिस को वरिष्ठ महिला अधिकारी से जांच कराने का आदेश दिया.

Supreme Court Karkardooma Court

कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में वकील मधु पर हुए हमले का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने महिला पर पति द्वारा किए गए हमले का स्वतः संज्ञान लिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पूछा कि आखिर अस्पताल ने इलाज करने से इनकार क्यों किया? सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि अस्पतालों ने आपातकालीन चिकित्सा उपचार देने से इनकार क्यों किया? कोर्ट ने जाँच अधिकारी को निर्देश दिया है कि मामले की जाँच कर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

वरिष्ठ महिला अधिकारी को जांच की कमान

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि मामले की जाँच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए. कोर्ट ने कहा कि मामले की जाँच महिला एसीपी (ACP) या डीसीपी (DCP) रैंक के अधिकारी से कराई जाए. वहीं मामले में पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे रिमांड पर भेज दिया गया है. उन्होंने जानकारी दी कि पहले एम्स में उनका इलाज हुआ और बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है.

नाबालिग बच्चों की सुरक्षा और कस्टडी

कोर्ट ने दोनों नाबालिग बच्चों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि बड़ी बेटी की कस्टडी उसके नाना-नानी के पास रहेगी. सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि दो नाबालिग बच्चे पति के परिवार के साथ हैं और एक पीड़िता के माता-पिता के साथ है. रात में बच्चों को बाहर छोड़ दिया गया था, जिससे अस्पताल में भर्ती माँ उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है. इस पर सीजेआई ने कहा कि वह एक बहादुर महिला हैं, उन्हें पहले अपने स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान देना चाहिए.

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वित्तीय सहायता जारी करने का निर्देश

अदालत ने कहा कि चूंकि पीड़िता को वित्तीय सहायता की सख्त जरूरत है, खासकर इलाज कराने और बेटी की देखभाल के लिए, इसलिए हम नालसा (NALSA) को कल तक पीड़िता के पक्ष में धन राशि जारी करने का निर्देश देते हैं. मामले की सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट को बताया कि पति ने उन पर बेरहमी से चाकू से हमला किया था, जिसके बाद उन्हें तीन अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन तीनों ने मामला गंभीर बताकर इलाज करने से इनकार कर दिया था. इस पर सीजेआई ने आश्वासन दिया कि शिकायत मिलते ही मामला दर्ज कर लिया गया है.



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