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सुप्रीम कोर्ट में मणिपुर हिंसा पर बड़ा खुलासा: पूर्व सीएम बीरेन सिंह की भूमिका पर फोरेंसिक रिपोर्ट, जांच जारी

मणिपुर हिंसा मामले में मणिपुर के पूर्व सीएम बीरेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंप दी है. जिसको देखने के बाद सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कहा आप अपने अधिकारियों से इस बारे में बात कीजिए. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है.

मणिपुर में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है. कोर्ट ने एसजी से पूछा जांच के लिए कितना समय चाहिए, जिसपर एसजी ने कहा 1 महीने का चाहिए. कोर्ट ने नए सिरे से रिपोर्ट को दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े किसी भी गलत कार्य में शामिल लोगों की रक्षा करने की कोई आवश्यकता नही है.

एक महीने का समय मांगा

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब याचिकाकर्ता के विश्वसनीयता पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल खड़ा किया. एसजी मेहता ने कहा कि यह कोई नौसिखिया संगठन है. इसपर कोर्ट ने जवाब दया, “हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. याचिकाकर्ता को नजर अंदाज कर दें, लेकिन अगर कुछ गलत किया गया है तो उस गलत को बचाने की जरूरत नही है. यह याचिका कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की ओर दायर की गई है.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जातीय हिंसा को बढ़ावा देने में मणिपुर के पूर्व सीएम बीरेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर लीक ऑडियो टेप पर फोरेंसिक रिपोर्ट देने को कहा था. टूथ लैब्स की स्थापना साल 2007 में हुई थी. ये भारत की पहली नॉन गवर्मेन्ट फूल फ्लेज्ड फोरेंसिक लैब है. जिसने पुष्टि की है कि 93 % ऑडियो टेप मुख्यमंत्री के आवाज से मेल खाते है.

दायर याचिका में सीएम पर मणिपुर में हिंसा भड़काने का आरोप है. कथित तौर पर ऑडियो में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के बयानों को रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें राज्य की जातीय हिंसा में उनकी संलिप्तता का संकेत दिया गया था. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि जो टेप सामने आए है, वे बहुत गंभीर है. इस पर सीजेआई ने कहा था कि सुनिश्चित कीजिए कि ये एक और मुद्दा न बने.

वकील प्रशांत भूषण ने लगाए गंभीर आरोप

पिछली सुनवाई में वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मणिपुर के मुख्यमंत्री का एक ऑडियो टेप सामने आया है, जिसमें उन्हों दावा करते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने ही राज्य में हिंसा भड़काई, हथियारों को लूटने दी और हिंसा में शामिल लोगों को संरक्षण दिया.

सुप्रीम कोर्ट इस टेप की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए सहमत हो गया था. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशांत भूषण के इस दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा था “न्यायाधीश हाथी दांत के महलों में रह रहे हैं”. जिसपर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा था “बिल्कुल नहीं, हम चीजों को दबाने के किसी भी प्रयास की सराहना नहीं करते. हम मणिपुर की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं”.

ये भी पढ़ें: बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने किया बदलाव, डीजीपी की निगरानी में SIT जांच का आदेश दिया

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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