बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की देखरेख में एसआईटी गठत का आदेश दिया है. जबकि हाई कोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त लखमी गौतम की जगह की अध्यक्षता में गठित एसआईटी मामले की जांच करेंगी. जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है. महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई थी.
राज्य सरकार ने कहा एसआईटी के गठन पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन डीजीपी की देखरेख में एसआईटी गठित किया जाना चाहिए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में बदलाव किया है. हाई कोर्ट ने पुलिस के अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त को पुलिस उपायुक्त की निगरानी में एक एसआईटी गठित करने और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी शिंदे की 23 सितंबर ब2024 को पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हो गई थी.
पांच पुलिसकर्मियों को ठहराया गया दोषी
मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट में पांच पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि शिंदे के माता-पिता के दावे में दम है कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी. बदलापुर में बच्चियों के यौन उत्पीड़नमामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि लड़को को छोटी उम्र से ही लैंगिक समानता के बारे में शिक्षित करने और संवेदनशील बनाया जाए. साथ ही उनकी मानसिकता को बदलने की जरूरत है.
कोर्ट ने कहा था कि समाज में पुरूष प्रधान की मानसिकता को बदलने के लिए लड़कों को कम उम्र से ही सही और गलत व्यवहार के बारे में सिखाया जाए. कोर्ट ने आगे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए स्कूल में पालन करने वाले नियमों की सिफारिश करने के लिए एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिए थे. बता दें कि एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनाए निर्देश को पूरे देश में लागू कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 2019 में ही याचिका दाखिल कर रखा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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