Asaram Son case: रेप मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम के बेटे नारायण साईं को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पहले गुजरात हाई कोर्ट जाने को कहा है और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उनकी अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला कराया जाए.
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कहा कि अगर तीन महीने में हाई कोर्ट फैसला नहीं करता है, तो नारायण साईं दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.
सुनवाई के दौरान नारायण साईं की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने कहा कि अपील की जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन उस पर अब तक सुनवाई नहीं हुई. उन्होंने दलील दी कि मामला 12 साल से लंबित है और प्रथम दृष्टया अपराध भी नहीं बनता. उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हाई कोर्ट को सजा निलंबन के मामले में गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दे चुका है, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई.
वहीं, गुजरात हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि नारायण साईं करीब 11 साल जेल में रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने 2019 से अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ दाखिल अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया. अदालत ने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार अस्थायी और स्थायी जमानत के लिए अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं.
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गौरतलब है कि सूरत की एक अदालत ने 2013 में दर्ज रेप मामले में नारायण साईं को दोषी ठहराया था. शिकायतकर्ता, जो आसाराम आश्रम में सेविका थी, ने आरोप लगाया था कि 2002 से 2005 के बीच नारायण साईं ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया. शिकायतकर्ता की बड़ी बहन ने भी आसाराम के खिलाफ इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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