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नीतीश कटारा हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव की अंतरिम जमानत दो सप्ताह के लिए बढ़ाई

साल 2002 के बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में दोषी विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को कोर्ट ने बरकरार रखा है. कोर्ट ने विकास यादव को मिली अंतरिम जमानत की अवधि को दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 27 मई तक एक दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिससे पता चले कि उसकी मां की सर्जरी हुई है.

पिछले दिनों कोर्ट ने विकास यादव को बीमार माँ की देखभाल करने के लिए कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दिया था. साथ ही कोर्ट ने नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा और अजय कटारा को उत्तराखंड सरकार से सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अगर नीलम कटारा और अजय कटारा दिल्ली आते है तो, दिल्ली पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी.

अंतरिम जमानत शर्तों के साथ दी गई थी

कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया था कि एम्स में भर्ती रहने के दौरान विकास यादव अपनी मां से नही मिल सकते है. घर आने के बाद ही वो मिल सकते है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा था कि विकास यादव की मां को कुछ हो जाए तो क्या आप जिम्मेदारी लेंगे. कोर्ट ने संकेत देते हुए कहा था कि दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा था कि वह यादव पर सख्त प्रतिबंध लगाएगी.

कोर्ट ने एएसजी से कहा था कि यह सही नही है. इस व्यक्ति (विकास यादव) ने 23 साल जेल में बिताए हैं. क्या हमें मां की हालत को ध्यान में रखते हुए अस्थायी जमानत देने का अधिकार नहीं है? मां का क्या दोष है? अगर उसकी मां को कुछ हो गया तो क्या आप जिम्मेदारी लेंगे.

उम्रकैद की सजा घटाकर 25 साल की गई

निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ विकास और विशाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने विकास और विशाल को आजीवन कारावास की सजा को 25 साल की सजा में तब्दील कर दिया था. 17 फरवरी 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास यादव और विशाल यादव को मौत की सजा देने से इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला केवल हत्या का है न कि जघन्यतम अपराध का. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस मामले में आजीवन जेल में रखने की भी सजा नही दी जा सकती.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट से नागालैंड के पूर्व जिला जज इनेलो झिमोमी को राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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