दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) से जुड़े अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को 15 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत की अवधि को बढ़ा दिया है. दोनों को न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. जिसके बाद कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत की अवधि को बढ़ा दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान अमिताभ झुनझुनवाला को खराब सेहत के कारण जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने जेल ऑथरिटी से अमिताभ झुनझुनवाला के स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है. इन दोनों को आरएचएफएल (RHFL) और आरसीएफएल (RCFL) से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था.
ये मामला पीएमएलए (PMLA) के तहत दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसकी नींव सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है. ईडी के मुताबिक दोनों आरोपियों को अपराध की आय को छिपाने और उसे वैध दिखाने में भूमिका निभाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
झुनझुनवाला मार्च 2003 से सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक थे, जो आरएचएफएल (RHFL) और आरसीएफएल (RCFL) की होल्डिंग कंपनी हैं. एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, रिलायंस एडीए ग्रुप ने साफ किया कि मिस्टर झुनझुनवाला और मिस्टर बापना दोनों का पिछले सात सालों से ग्रुप से कोई लेना-देना है.
इसमें कहा गया है, मीडिया के सवालों के आधार पर रिलायंस ग्रुप ये साफ करता है कि अमिताभ झुनझुनवाला ने सितंबर 2019 में यानी करीब सात साल पहले ग्रुप छोड़ दिया था. उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नहीं रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पवार लिमिटेड भी शामिल है.
वहीं, अमित बापना ने दिसंबर 2019 में रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. उसके बाद उनका ग्रुप से कोई संबंध नहीं रहा, जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर भी शामिल हैं.
इससे पहले इसी महीने सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसमें आरोप है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को 3750 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
सीबीआई ने LIC की ओर से मिली शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया है. इसमें साजिश, धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
दर्ज शिकायत में कहा गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिसंपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए. इन भ्रामक जानकारियों के आधार पर एलआईसी को 4500 करोड़ रुपए के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया. सीबीआई के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए धन का दुरुपयोग किया.
इस मामले में एलआईसी की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था. 15 अक्टूबर 2020 को आई बीडीओ इंडिया एलएलपी की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए है.
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-भारत एक्सप्रेस
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