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SC ने दिल्ली के मयूर बिहार स्थित इन मंदिरों को तोड़ने के लिए DDA द्वारा दिए गए नोटिस के खिलाफ दायर याचिका को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मयूर बिहार स्थित कालीबाड़ी, अमरनाथ और बदरीनाथ मंदिरों को तोड़ने के लिए डीडीए द्वारा दिए गए नोटिस के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस बिक्रमनाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया है. याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जाए. जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की अनुमति दे दिया है.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा ये सवाल

याचिकाकर्ता ने कहा कि यह मंदिर 35 साल से है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप अनुच्छेद 32 के तहत याचिका क्यों नही दाखिल की है. वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि रात ने प्रक्रिया शुरू की गई और सुबह मंदिर ध्वस्त करने पहुंच गए. 500 सुरक्षा बल और अधिकारी पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जितना हमें बता रहे हैं. इस मामले में बहुत कुछ है. यह याचिका तीनों मंदिर समितियों की ओर से विष्णु शंकर जैन ने दायर किया था.

दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने मामले में दिया ये निर्देश

विधायक रवि नेगी ने बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले में दिल्ली के राज्यपाल से बात की और डीडीए के अधिकारियों से चर्चा कर बुलडोजर की कार्रवाई को रोकने का निर्देश दिया. स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मंदिर 40 साल पुराना है. लोगों के मुताबिक सभी मंदिर रजिस्टर्ड है, हर साल दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा कार्यक्रम होते आ रहे हैं. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर से सालों पहले आए कश्मीरी पंडितों ने अमरनाथ मंदिर और बदरीनाथ मंदिर बनवाया था और इतने सालों बाद अचानक नोटिस मिलने से स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताई है.

कश्मीरी पंडितों द्वारा बनवाया गया था मंदिर

स्थानीय लोगों के मुताबिक जो नोटिस चस्पा किया गया है उसमें अधिकारियों का हस्ताक्षर नही है, जिसको लेकर सवाल खड़ा किया गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक तीनों मंदिर कश्मीरी पंडितों ने बद्रीनाथ और अमरनाथ मंदिर को बनवाया था. इतने साल बाद अब मंदिरों को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है. कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी के मुताबिक वो पिछले 10 साल से मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं. किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी, लेकिन अब अचानक मंदिर पर नोटिस चस्पा किया गया है.

डीडीए के विभाग ने तीनों मंदिरों को बताया अवैध

डीडीए के हॉर्टीकल्चर विभाग ने इन तीनों मंदिरों को अवैध बताया है. डीडीए का कहना है कि मंदिरों को ग्रीन बेल्ट में बनाया गया है. मंदिरों के बाहर विभाग द्वारा नोटिस चस्पा किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि 25 अक्टूबर 2024 को रिलिजियस कमिटी की प्रिंसिपल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. कमेटी ने डीडीए को अतिक्रमण और अवैध तरीके से बनाए गए धार्मिक ढांचों को हटाने की सिफारिश की थी. नोटिस में कहा गया है कि 20 मार्च को संजय झील ग्रीन एरिया में बनाए गए धार्मिक ढांचों को हटाया जाए.

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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