सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता झेलने और सेवा से बाहर किए गए सैन्य कैडेट्स को दिए जाने वाले आर्थिक सहायता राशि और बीमा लाभ बढ़ाने को कहा है.
साथ ही कोर्ट ने ऐसे कैडेट्स के लिए मेडिकल पुनर्मूल्यांकन और पुनर्वास योजना तैयार करने को कहा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि 2017 में तय की गई राशि को अभी तक नही बढ़ाया गया है, जबकि महंगाई काफी बढ़ गई है.
कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ वकील और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज रेखा पल्ली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. कोर्ट 7 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि मौजुदा बीमा योजनाएं पर्याप्त नहीं है और सरकार को इन्हें एनडीए, आईएमए व अन्य प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले के आधार पर ग्रुप इंश्योरेंस के रूप में विस्तार देने पर विचार करने को कहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि सभी आउटबोर्ड कैडेट्स को ECHS में शामिल कर लिया गया है. मौत की स्थिति में 12.5 लाख और 9 हजार रुपए मासिक.पेंशन मिलती है.
दिव्यांग कैडेट्स को 9 हजार रुपए से लेकर 100 फीसदी दिव्यांगता पर 16 हजार रुपए की अनुग्रह राशि दी जाती है. जबकि सेना समूह बीमा कोष के तहत मौत होने पर 1 करोड़ और 100 फीसदी दिव्यांगता पर 25 लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलता है.
बता दें कि कैडेट्स को फिलहाल 40 हजार रुपए तक का सहानुभूति राशि दिया जाता है, जो कि उनकी चिकित्सा जरूरतों के लिए काफी कम है. कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सहानुभूति राशि बढ़ाने पर विचार करने को कहा है, ताकि घायल कैडेट्स सही इलाज करा सके.
यह मामला 12 अगस्त को तब दर्ज किया गया था, जब एक मीडिया रिपोर्ट में इन कैडेट्स के मुद्दे को उठाया गया था. ये कैडेट कभी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी जैसे देश के शीर्ष सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण का हिस्सा थे.
रिपोर्ट के मुताबिक 1985 से लेकर अभी तक 500 सेना अधिकारी कैडेट्स प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हो चुके है, जिन्हें चिकित्सीय आधार पर बाहर कर दिया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अकेले एनडीए में ही लगभग 20 ऐसे कैडेट्स हैं जिन्हें जुलाई 2025 के बीच पांच साल में ही छुट्टी दे दी गई.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक पूर्व सैनिक का दर्जा पाने के हकदार नहीं है, जिससे वे पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के तहत सैन्य सुविधाओं के पात्र हो जाते है, जबकि उनकी विकलांगता, अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करने से पहले प्रशिक्षण के दौरान हुई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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