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2 से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर रोक गलत? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दो से अधिक बच्चे होने पर पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों की वैधता पर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि भारत मे घटती प्रजनन दर के कारण इन कानूनों का मूल उद्देश्य अब प्रासंगिक नहीं रह गया है.

कोर्ट ने पुनः विचार करने का संकेत दिया

कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर पुनः विचार करने का संकेत दिया है, जिनमें 2 बच्चों के नियम को लागू करने वाले कानूनों को सही ठहराया गया था. कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनावों में दो से अधिक बच्चे वाले लोगों को अयोग्य ठहराने वाले कानून अब अप्रसांगिक हो गए हैं. कोर्ट ने कहा कि भारत में घटती प्रजनन दर जनसांख्यिकी बदलावों को देखते हुए ऐसे प्रतिबंधों के पीछे का तर्क अब खत्म हो चुका है. कोर्ट ने काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव की अयोग्यता को भी रद्द कर दिया है.

13 सितंबर 2000 से जब इसमें संशोधन लागू हुआ

मंगला भीमराव को महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम 1959 की धारा 14 (1(j-1) के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था. 1959 के इस कानून में 13 सितंबर 2000 से जब इसमें संशोधन लागू हुआ था, उसमें दो से अधिक बच्चे न होने की शर्त जोड़ी गई थी. कोर्ट ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, अब घटकर 1.9 रह गई है. मंगल इंगले महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई थी. उनके खिलाफ शिकायत की गई थी कि उनके तीन बच्चे है. जबकि महाराष्ट्र में लागू कानून के तहत दो से अधिक बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने और पद पर बने रहने की अयोग्यता हो सकती है. इसी आधार पर प्रशासन ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

उन्होंने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी. अदालत ने कहा क्या बदलती सामाजिक और जनसांख्यिकी परिस्थितियों में इन कानूनों का मूल उद्देश्य अब उतना ही प्रासंगिक है, जितना इन्हें लागू करते समय था. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल कई बार चुनाव में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के खिलाफ शिकायत करने और उन्हें चुनावी मुकाबले से बाहर करने के लिए किया जा सकता है. इसलिए इस नीति के प्रभाव और इसके दुरुपयोग की आशंका पर भी विचार होना चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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