मध्य प्रदेश में खेती-किसानी को ज्यादा लाभदायक बनाने के लिए राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में कई स्तरों पर काम करने की बात कह रही है. किसानों को सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और खेती के नए तरीकों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए सोलर पंप पर सब्सिडी, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है. इसके तहत अगले पांच वर्षों में कृषि से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार की योजना है कि किसानों की खेती की लागत कम हो, उत्पादन बेहतर मिले और उनकी आमदनी के लिए खेती के अलावा दूसरे विकल्प भी विकसित हों.
आज खेती केवल बीज बोने और फसल काटने तक सीमित नहीं रह गई है. बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत के बीच किसानों के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी होता जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में किसानों को वैज्ञानिक और उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.
सरकार की ओर से वर्षा जल का संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल और जैविक व प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की पहल की जा रही है. इसका मकसद खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है, ताकि किसान जमीन की उर्वरता बनाए रखते हुए बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें.
इसके साथ ही फसल विविधीकरण को भी अहम माना जा रहा है. यानी किसान केवल एक या दो फसलों पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने इलाके की मिट्टी, पानी और बाजार की मांग के अनुसार दूसरी फसलों की खेती भी करें. इससे मौसम या बाजार में बदलाव आने पर नुकसान का जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की अहम भूमिका है. उपलब्ध कराए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत बताई गई है. यही वजह है कि यहां खेती में होने वाला बदलाव सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को प्रभावित करता है.
उत्पादन के मामले में भी मध्य प्रदेश ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है. राज्य को दालों के उत्पादन में पहला स्थान मिलने का दावा किया जाता है, जबकि गेहूं और तिलहन के उत्पादन में यह दूसरे स्थान पर है. श्रीअन्न यानी मोटे अनाज के उत्पादन में भी राज्य की स्थिति मजबूत बताई गई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश को सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुका है.
फल, सब्जियों और मसालों के उत्पादन में भी प्रदेश की अच्छी भागीदारी है. संतरा, लहसुन, अदरक, धनिया और मसालों के उत्पादन में राज्य का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. वहीं मटर, प्याज, मिर्च और अमरूद जैसी फसलों के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. फूलों के साथ औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती में भी यहां संभावनाएं बढ़ रही हैं.
रिपोर्ट- रविशंकर (लेखक और पत्रकार)
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