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‘जजों ने खेले बैडमिंटन…’, CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी करने वाले संजय राउत और निखिल वागले पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा

पत्रकार निखिल वागले और उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वागले को वर्चुअल और राउत को फिजिकली पेश होने का निर्देश दिया है. दोनों ने सीजेआई सूर्यकांत को लेकर टिप्पणी की थी.

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है. एससीबीए ने सीजेआई सूर्यकांत के बारे में वागले और राउत की आपत्तिजनक टिप्पणियों का हवाला देते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंक्टरमणी से सहमति मांगी थी. जिसे अटॉर्नी जनरल ने दे दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान वागले की ओर से पेश वकील इंदिरा जयसिंह ने न्यायपालिका और वकीलों के बीच आपसी सम्मान की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि वकील इस संस्थान के प्रति समर्पित है, लेकिन संस्थान को भी वकीलों के प्रति सम्मान और अपनापन दिखाना चाहिए. उन्होंने अदालत से वकीलों की बढ़ती निराशा को समझने और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की अपील की है. इसपर अदालत ने भरोसा दिलाया कि संस्थागत सुधार के लिए कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम किया जाएगा.

मतदाता सूची के एसआईआर पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे राहुल गांधी और खड़गे

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अवमानना कानून के न्यायपालिका पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों पर भी चर्चा की. लेकिन कोर्ट ने इन संस्थागत चिंताओं को मौजूदा मामले से लग रखा. बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने से इनकार कर दिया था, जो उन्हें मतदाता सूची के एसआईआर के संबंध में एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे.

सीजेआई ने कहा था कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथकरण के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ होगा, जो सविधान के मूल ढांचे का एक अहम हिस्सा है. 12 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने दावा किया था कि उन्होंने सीजेआई सूर्यकांत सहित 60 से 70 जजों को लंदन में भाजपा नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते देखा था.

पत्रकार वागले ने 11 अक्टूबर को अपने एक्स हैंडल पर सीजेआई के खिलाफ एक आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की थी. एससीबीए की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राउत ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीश सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते है और मुख्यमंत्रियों द्वारा आयोजित रात्रिभोज में जाते है.

उन्होंने कुछ तस्वीरों और घटनाओं का संदर्भ देते हुए न्यायपालिका पर सवाल उठाए थे. एससीबीए का कहना है कि वागले और राउत द्वारा दिए गए बयान तथ्यों के विपरीत है और जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा तथा अधिकार को कम करने के उद्देश्य से दिया गया.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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