सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्तियों (Waqf properties) के पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट याचिककर्ताओ को वक्फ ट्रिब्यूनल जाने को कहा है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह आदेश दिया है.
इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने कहा था कि कानून को छह महीने का समय दिया गया था, जिसमें से पांच महीने फैसला आने में बीत गया है, अब सिर्फ एक महीना बचा है. मुस्लिम संगठनों ने इस नए वक्फ संशोधन कानून 2025 का विरोध किया है. इस कानून की विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और सिख व ईसाई समुदाय समेत अन्य अल्पसंख्यकों द्वारा भी आलोचना की गई है.
इसको लेकर मौलाना रहमानी ने कहा था कि इस कानून को न केवल मुस्लिम संगठनों, बल्कि विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों, सिख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने भी अस्वीकार किया हैं. इसके बावजूद सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की योजना को बोर्ड ने गैरकानूनी करार दिया है. उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ और सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन मामले की अवमानना बताया था.
बता दें कि वक्फ संशोधन एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि इस कानून में मौजूद विवादित प्रावधानों को तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जबतक इसपर कोई फैसला नहीं आ जाता.
दरअसल सरकार द्वारा लाया लॉन्च किया जा रहा वक्फ उम्मीद पोर्टल केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहल है. जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत पंजीकरण और प्रबंधन करना है. सरकार के दावा है कि यह पोर्टल वक्फ.संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और अवैध कब्जे को रोकेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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