झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सीजेआई बी. आर गवई, जस्टिस के चंद्रन और एन वी अंजारिया की पीठ ने दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है. सीजेआई गवई ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंदियों द्वारा अवमानना याचिका दायर की गई है. हम अवमानना याचिकाओं पर विचार करने के इच्छुक नहीं है.
वही कोर्ट ने झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई ने कहा कि अवमानना के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल राजनीतिक बदला लेने के लिए न करें. सीजेआई ने कहा मतदाताओं के सामने अपना हिसाब चुकाएं. कोर्ट प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा निर्देश से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. जिन राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नियम बनाए है, उन राज्यों को एमिकस क्यूरी इसे रिकॉर्ड पर लाएंगे.
हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान प्रकाश सिंह ने कोर्ट को बताया कि डीजीपी की नियुक्ति को लेकर दिए गए दिशा निर्देशों का पिछले 6 सालों से पालन नही हुआ है. बाबू लाल मरांडी ने दायर याचिका में कहा था कि नए नियमों के तहत संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि पहले राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी द्वारा चयनित वरिष्ठ अधिकारियों की पैनल सूची के आधार पर होती थी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार कानून अपने हाथ में ले रही है.
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2006 को दिए गए अपने आदेश में यह कहा था कि राज्य सरकार डीजीपी के पद पर प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों की सूची लोक सेवा आयोग को भेजेगी. आयोग द्वारा तैयार पैनल से सरकार किसी को डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी. नियुक्ति की तिथि से डीजीपी का कार्यकाल दो साल के लिए होगा, भले ही उसके सेवानिवृत्ति की तिथि पहले हो डीजीपी की नियुक्ति पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगी. इसमें किसी तरह का दबाव या प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
बता दें कि झारखंड सरकार ने अब डीजीपी की नियुक्ति के लिए नई नियमावली बनाई है. इसके तहत नॉमिनेशन कमेटी बनाई गई है. इसी समिति ने अनुराग गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई. इसके बाद उन्हें स्थाई डीजीपी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2006 को दिए गए अपने आदेश में यह कहा था कि राज्य सरकार डीजीपी के पद पर प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों की सूची लोक सेवा आयोग को भेजेगी.
आयोग द्वारा तैयार पैनल में से सरकार किसी को डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी. अनुराग गुप्ता के मामले में झारखंड सरकार द्वारा ऐसा नही किया गया और यूपीएससी को नाम भेजे परमानेंट डीजीपी बना दिया था.
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भारत एक्सप्रेस
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