सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने स्वरूप में वापस आ लौट गया है. सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 से 5 के बीच लगे ग्लास ग्लेजिंग को हटाने का फैसला लिया गया है. सीजेआई ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायधीशों की सहमति के बाद हटाया गया है. क्योंकि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने आपत्ति जाहिर की गई थी.
एससीबीए और SCAORA ने कहा था कि कोर्ट नंबर 1 से 5 के बीच लगे ग्लास ग्लेजिंग से कोर्ट की कोर्ट की सुंदरता खत्म हो गई है. साथ ही कोर्ट में जाने में भी दिक्कत हो रही है. उनका यह भी मानना है कि ग्लास ग्लेजिंग के चलते कोर्ट रूम में रोशनी की कमी हो गई है. जिस चिंता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने विचार-विमर्श के बाद इसे हटाने का फैसला लिया गया है. सीजेआई बी आर गवई द्वारा सुप्रीम कोर्ट में किये गए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है.
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने पिछले सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड द्वारा सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक चिन्ह को बदले जाने और सुप्रीम कोर्ट गलियारे में गर्म और सर्द हवाओं के रोकने के लिए शीशे के दरवाजे लगाकर गलियारे को वातानुकूलित किए जाने पर आपत्ति जताई थी. पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड के कार्यकाल के दौरान न्यायालय परिसर में केंद्रीकृत एयर कंडीशनिंग का समर्थन करने के लिए ग्लास पैनल लगाए गए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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