सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट की पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह (Symbol) फ्रीज करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (EC) से एक अहम सवाल पूछा है. कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील को निर्देश दिया है कि वह आयोग से निर्देश लेकर अदालत को बताएं कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में दायर याचिका का निपटारा कितने समय में किया जाएगा.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी.
याचिकाकर्ता (TMC) का पक्ष: ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि उनके पास अब कोई अन्य कानूनी उपचार नहीं बचा है, क्योंकि उपचुनाव का शेड्यूल (कार्यक्रम) तय हो चुका है. उन्होंने कहा कि कार्यवाही जून में शुरू हुई थी और जुलाई में ही जवाब दाखिल कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद दूसरे पक्ष को बार-बार समय दिया गया और उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद पार्टी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया गया. सिब्बल ने कहा कि वह फिलहाल उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह समझ से बाहर है कि ऐसा कैसे हो सकता है.
अचानक आए अंतरिम आदेश पर कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि यह चुनाव आयोग का एक ‘अंतरिम आदेश’ है. वहीं, जस्टिस वी. मोहना ने कहा कि आयोग ने यह कदम दोनों पक्षों के हितों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी कहा कि आदेश सही या गलत हो सकता है, लेकिन यह एक अंतरिम आदेश है, कोई अंतिम (Final) निर्णय नहीं है और इस बात को ध्यान में रखना होगा. जस्टिस बागची ने यह भी जोड़ा कि यह चिंता का विषय जरूर हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल एक अंतरिम व्यवस्था के आधार पर कोई स्थायी निर्णय ले लिया जाए.
टीएमसी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा खुद को ‘असली टीएमसी‘ होने का दावा किए जाने के बाद यह विवाद खड़ा हुआ है. चुनाव आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड एलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 के तहत एक अंतरिम कदम उठाते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. आयोग ने पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है.
इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को किसी समझौते के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की असली पहचान व चुनाव चिन्ह को वापस पाने के लिए कड़ा संघर्ष करेंगी. ममता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ अपने 39 साल के लंबे राजनीतिक संघर्ष, त्याग और जुड़ाव का हवाला देते हुए कहा कि वह इस पार्टी को कभी नहीं छोड़ सकतीं.
Amit Shah Peepal Van Viksit Bharat Sankalp Park Nava Raipur: गृह मंत्री अमित शाह ने…
Devendra Fadnavis Pimpri Chinchwad Police Dial 112 response time: महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने…
Antaragni IIT Kanpur Social Initiatives: IIT कानपुर में आज मनोरंजन के साथ समाज सेवा का…
UP News: मेरठ के सोतीगंज इलाके में यूपी STF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई…
Amit Shah Chhattisgarh Rajyotsav speech Nava Raipur SIR: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में गृह मंत्री अमित शाह…
दिल्ली के पंजाबी बाग में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित भव्य कार्यक्रम…