Supreme Court ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है. Supreme Court ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने पर शिकायतकर्ता पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने आपराधिक कानून के दुरुपयोग के मामले में यह जुर्माना लगाया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश दिया है. जुर्माने की यह राशि शिकायतकर्ता से वसूल कर अपीलकर्ताओं के बैंक खाते में जमा कराने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि शिकायत की गई बातों से एफआईआर दर्ज किए जाने का कोई औचित्य नहीं था. ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को सिविल कोर्ट में जाने की सलाह दी जानी चाहिए थी. इसके साथ ही कोर्ट ने अपीलकर्ता के.अपील को.स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट को फैसले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पूरी तरह से दीवानी मामला था. लेकिन इसे आपराधिक रंग देकर एफआईआर दर्ज कराई गई.
कोर्ट यह जानकर स्तब्ध रह गया कि अपीलकर्ता जो एक 70 साल की महिला है. और एक सेवानिवृत्त सेना के अधिकारी की पत्नी हैं, इन्हें ऐसे आरोपों में गिरफ्तार कर आठ दिन तक पुलिस हिरासत में रखा गया, जिनमें कोई. संज्ञेय अपराध बनता ही नही था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता को ब्याज नही बल्कि दंडित किया जाना चाहिए, क्योंकि उसने आपराधिक कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग किया है. इतना ही नहीं कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की भी आलोचना की है.
हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं द्वारा एफआईआर रद्द करने की याचिका को बिना कोई कारण बताए एक पेज में खारिज कर दिया था. जिसकी आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें हाई कोर्ट की यह सरलीकृत और सतही कार्यप्रणाली अत्यंत निराशाजनक लगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए झूठी एफआईआर दर्ज कराई. यह पूरी तरह से दीवानी विवाद था, जिसे आपराधिक मुकदमे की शक्ल देकर कानून का दुरुपयोग किया गया.
कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता 70 वर्षीय महिला की गिरफ्तारी और उसकी हिरासत पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक थी. कोर्ट ने हैदराबाद के पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक से पीड़ित महिला को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है. यह मामला मौखिक सौदे से जुड़ा था, जिसमें अपीलकर्ताओं पर 2.8 करोड़ रुपए लेकर.प्लॉट और फॉर्महाउस की रजिस्ट्री न कराने का आरोप लगाया था.
शिकायतकर्ता एक प्रभावशाली बिल्डर संध्या कंस्ट्रक्शन एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड का एजेंट है. जबकि अपीलकर्ताओं का तर्क है कि पूर्ण भुगतान नहीं हुआ था, इसलिए बिक्री की शर्तें पूरी नहीं हुई और इस बाबत दीवानी वाद पहले ही दायर किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया जा एफआईआर उन्हें दबाव में लाने के लिए दर्ज कराई गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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