दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने अनुसूचित जाति (एस सी) और अनुसूचित जनजाति (एस टी) कानून के तहत मिलने वाले पीड़ित मुआवजा योजना का दुरुपयोग करने के आरोप में एक वादी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं तुषार राव गेडेला की बेंच ने वादी बलबीर मीणा से कहा कि वह जुर्माने की राशि को दो सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति के पास जमा कराए अन्यथा रजिस्ट्रार उसे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल करें.
कोर्ट ने क्या कहा? (Delhi High Court)
अदालत (Delhi High Court) ने कहा कि वादी ने पहले भी वर्ष 2014 में उसी व्यक्ति के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति कानून की उन्हीं धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराया था. जिसमें उसे 2.40 लाख रुपए का मुआवजा दर्ज कराया था. उससे उसके बयान की प्रामाणिकता और सत्यता पर गंभीर संदेह पैदा होता है. उसने दूसरे प्राथमिकी दर्ज कराया है. उस मामले में चार्जशीट अक्टूबर 2019 में दाखिल किया गया था.
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वादी ने उसी तरह से मुआवजा देने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन दिया और मुआवजा नहीं मिलने पर एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की. एकल पीठ ने उसकी याचिका इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसने आरोपी के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से मामले को सुलझा लिया है. उस आधार पर उससे संबंधित प्राथमिकी रद्द कर दी थी. साथ ही यह भी बताया कि वादी मुआवजा पाने का हकदार क्यों नहीं है.
वादी ने उस आदेश को दो सदस्यीय पीठ के समक्ष चुनौती दी तो पीठ ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा और उसकी अपील को खारिज कर दिया. साथ ही इस तरह से मुआवजा योजना का दुरुपयोग करने से रोकने के लिए उसके खिलाफ जुर्माना लगाया.
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-भारत एक्सप्रेस
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