सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नियुक्तियों से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि अगर किसी सर्विस रूल्स में उम्मीदवार की योग्यता को लेकर पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) के फैसले को अंतिम माना गया है, तो राज्य सरकार बाद में उसी उम्मीदवार की योग्यता की नए सिरे से पूरी जांच नही कर सकती.
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शैलेन्द्र कुमार पटेल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि जब पीएससी किसी उम्मीदवार की योग्यता की जांच कर उसे योग्य पाता है और नियुक्ति के लिए उसकी सिफारिश करता है, तो सरकार स्वतंत्र रूप से के अलग जांच कर उम्मीदवार की योग्यता पर दोबारा फैसला नही कर सकती.
दरअसल शैलेंद्र कुमार पटेल से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारा मानना है कि सरकार के लिए योग्यता के मुद्दे की स्वतंत्र रूप से दोबारा जांच करना और विस्तृत जांच केआधार पर कोई अलग निष्कर्ष निकालना संभव नही था, क्योंकि योग्यता पर विचार करने का अधिकार नियुक्ति करने वाले अधिकारी से कानूनी रूप से लेकर विशेष रूप से कमीशन को सौंप दिया गया.
कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस रूल्स 1983 के नियम 10 के तहत, योग्यता पर कमीशन का फैसला फाइनल है. पटेल को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद के लिए चुना था और उनकी नियुक्ति की सिफारिश राज्य सरकार से की थी. लेकिन पीएससी की सिफारिश के बावजूद राज्य सरकार ने उम्मीदवार की योग्यता की जांच के लिए अपनी एक समिति गठित कर दी. इस समिति ने जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि शैलेंद्र कुमार पटेल के पास रजिस्ट्रार पद के लिए आवश्यक अनुभव नही है.
इसके आधार पर उन्हें अयोग्य मान लिया गया. मामला अदालत पहुचा और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने साथ-साथ डिवीजन बेंच ने भी राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया था. हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा उम्मीदवार की योग्यता की जांच कराए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्टेट यूनिवर्सिटीज सर्विस रूल्स 1983 का नियम 10 कैंडिडेट की योग्यता पर कमीशन के फैसले को अंतिम मानता है.
हालांकि नियम 10 नियुक्ति करने वाले अधिकारी के योग्यता के.संबंध में.सत्यापन करने के अधिकार को रोकता या सीमित नहीं करता, लेकिन योग्यता पर नियुक्ति करने वाले अधिकारी का ऐसा कोई भी फैसला योग्यता में स्पष्ट और साबित होने वाली कमी पर आधारित होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जहां नियमों में पीएससी को उम्मीदवार की योग्यता तय करने का अंतिम अधिकार दिया गया है, वहां सरकार चयन प्रक्रिया पूरी होने और सिफारिश किए जाने के बाद उम्मीदवार की पात्रता पर नए सिरे से फैसला नहीं कर सकती.
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-भारत एक्सप्रेस
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