मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से फिलहाल कोई कानूनी राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल पुराने बहुचर्चित ग्रामीण विकास बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक) धोखाधड़ी और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाला मामले में राजेंद्र भारती की दोषसिद्धि (Conviction) पर तुरंत रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भारती की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर औपचारिक नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों (मध्य प्रदेश सरकार व जांच एजेंसियों) से अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है.
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी राजेंद्र भारती की दोषसिद्धि पर स्टे (रोक) लगाने की याचिका को खारिज कर दिया था. इसके बाद भारती ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली स्थित राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी केस में राजेंद्र भारती और बैंक के तत्कालीन कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति दोनों को दोषी ठहराते हुए 3-3 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें उपरी अदालत में अपील दायर करने का अवसर देते हुए ₹50,000 के निजी मुचलके पर 30 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी थी.
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाला मामले में राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति का जाली दस्तावेज बनाना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना) और 471 (जाली दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग करना) के तहत दोषी करार दिया है.
यह पूरा आपराधिक मामला 25 साल पुराना है. जांच रिपोर्ट के अनुसार, विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी मां के नाम से बैंक में 10.50 लाख की एक एफडी (FD) तीन साल की अवधि के लिए कराई थी, जिस पर उस समय 13.50 फीसदी वार्षिक ब्याज मिल रहा था. आरोप है कि बाद में जालसाजी कर इस एफडी की परिपक्वता अवधि तीन साल से बढ़ाकर सीधे 15 साल कर दी गई.
इस गंभीर धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब इसी बैंक के कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में लिखित शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए इसे गंभीर धोखाधड़ी माना और आपराधिक केस दर्ज करने के आदेश दिए थे. जिस समय यह धोखाधड़ी अंजाम दी गई थी, उस समय राजेंद्र भारती खुद बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष (Chairman) पद पर आसीन थे.
ये भी पढ़ें: NEET पेपर लीक: CBI ने दाखिल की 20,000 पन्नों की चार्जशीट; राऊज एवेन्यू कोर्ट में 3 अगस्त को सुनवाई
अभियोजन पक्ष (Prosecution) के मुताबिक, राजेंद्र भारती ने अपने पद और शक्तियों का आपराधिक दुरुपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर लेजर बुक, एफडी स्लिप और जमा रसीदों में अवैध काट-छांट की. उन्होंने 3 साल की एफडी अवधि को बढ़ाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दिया. इसका मुख्य उद्देश्य अपनी मां और संबंधित संस्था को 13.50 फीसदी की ऊंची ब्याज दर का लाभ लंबे समय तक गैर-कानूनी तरीके से दिलाना था.
गहन वित्तीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि इस सोची-समझी हेराफेरी के जरिए वर्ष 1999 से लेकर वर्ष 2011 तक प्रतिवर्ष लगभग ₹1.35 लाख का अनुचित वित्तीय लाभ लिया गया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में नोटिस जारी होने के बाद अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं.
Anti Hindu Racism In USA: अमेरिका के सिएटल में दिवाली मना रहे हिंदुओं के कार्यक्रम…
Anant Singh News: अनंत सिंह की बेटी की शादी में पीएम मोदी और नीतीश-लालू को…
Indresh Kumar slams Sonia Gandhi book: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार…
Diwali Safety Tips: दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले हादसों से निपटने के लिए…
मध्य प्रदेश के रतलाम स्थित महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली पर भक्त कैश और गहने चढ़ाते…
Ramayana Box Office: अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर 'रामायण' को 'गॉडजिला माइनस जीरो' से कड़ी टक्कर…