लीगल

‘क्या उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सकता है?’ ओड़िशा के मां-बेटे की दयनीय हालत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गरीबी में रह रहे दिव्यांग लोगों की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़े मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने मामले में रिपोर्ट तलब किया है. कोर्ट ने पूछा है कि वर्तमान में उन्हें कोई सुविधा दी जा रही है या नही. कोर्ट जुलाई के तीसरे सप्ताह में मामले में अगली सुनवाई करेगा.ओडिसा के सुवर्णपुर जिले के बिनिका ब्लॉक के बगड़िया गांव में रहने वाले जन्मजात दृष्टिहीन जापा भुए और उनकी बुजुर्ग मां राधिका भुए का जीवन काफी गरीबी में कट रही है.

मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है.

परिवार की रहने की स्थिति और कल्याण जरूरतों पर रिपोर्ट मांगी गई

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि क्या श्रीमती भुए को सम्मानजनक जीवन दिया जा सकता है. कोर्ट ने राज्य सरकार से बुढ़ापे में मिलने वाले पेंशन, अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं, दृष्टिबाधित बेटे को मिल रहे लाभ से संबंधित जानकारी को तलब किया है. साथ ही कोर्ट ने राधिका भुए और उनके दृष्टिबाधित बेटे से व्यक्तिगत रूप से बात चीत करने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने उनके रहने की स्थिति तथा कल्याण संबंधी जरूरतों से संबंधित रिपोर्ट तलब किया है. जन्म से दृष्टिबाधित जापा भुए वृद्ध मां के साथ दयनीय हालत में रहते हैं. परिवार को न तो स्थायी घर मिला है और न ही सरकार से पर्याप्त सहायता. जबकि राज्य सरकार गरीबों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है.

आवास, पेंशन और खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुचाने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है. जिसका जीता जागता उदाहरण राधिका भुए की कहानी है. 56 वर्षीय जापा भुए जन्म से ही दृष्टिहीन है, और उन्होंने अपने आसपास की दुनिया कभी नहीं देखी. उनके लिए दिन-रात एक ही अंधेरा है.

हाल ही में अपने पिता की मौत के बाद उनका परिवार और भी अधिक असुरक्षित हो गया है. उनकी बुजुर्ग मां राधिका ही उनका देखभाल करती है और वही एक मात्र सहारा है. परिवार को सरकारी सहायता के नाम पर पेंशन और 10 किलों चावल मिलते हैं, जो मासिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नही है. उन्हें पड़ोसी कभी खाना दे देते है तो कभी भूखे सोना पड़ता है.

आर्थिक तंगी के कारण उनके पास कोई स्थायी घर नहीं है और वे एक टूटी फूटी एस्बेस्टर की इमारत में रहती है. अब देश के सबसे बड़ी अदालत के सामने आने के बाद उम्मीद है कि उनकी स्थिति में आने वाले समय में सुधार देखने को मिलेगा.

ये भी पढ़ें- महेश टिम्बर केस में ED का बड़ा एक्शन; बिना एंट्री के बदला बैंकिंग मैसेज, बैंकों को लगाया 155 करोड़ रुपए का चूना

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

सीएम योगी का बड़ा संदेश; ‘अब नहीं चलेगा भाई-भतीजावाद’, 4,543 नए दरोगाओं को दिए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती मॉडल पर फिर जताया भरोसा

लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए…

12 minutes ago

बद्रीनाथ पर मंडराया बर्फीले कहर का साया, 58.9 लाख घन मीटर बर्फ से तबाही की आशंका, वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी

बद्रीनाथ धाम के ऊपर मौजूद तीन हैंगिंग ग्लेशियरों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी…

29 minutes ago

दीपावली-छठ पर योगी सरकार का तोहफा, 12 दिन तक चलेंगी अतिरिक्त रोडवेज बसें

UPSRTC Diwali Chhath Special Bus: दीपावली और छठ पर्व पर यात्रियों की सहूलियत के लिए…

47 minutes ago

हाथ में नहीं टिकता पैसा? नरक चतुर्दशी और दिवाली की रात करें ये सरल शास्त्रीय उपाय, बरसने लगेगी मां लक्ष्मी की कृपा

दीपावली महापर्व पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा और स्थायी समृद्धि प्राप्त करने के लिए…

1 hour ago

9 नवंबर को 1,024 करोड़ की सौगात, 1,200 परिवारों को मिलेंगे घर; कांकरिया में दौड़ेंगी नई टॉय ट्रेन

Amit Shah Ahmedabad Visit: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 9 नवंबर को अहमदाबाद दौरे पर…

1 hour ago

VRINDAVAN: श्रीबांके बिहारी मंदिर में दर्शन के लिए नई व्यवस्था, दिवाली और कार्तिक मास में सुलभ दर्शन की तैयारी

Banke Bihari Temple: दिवाली और कार्तिक मास के पावन अवसर पर ब्रजभूमि के प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी…

1 hour ago