AI IMAGE
Supreme Court on GM Crops: आजकल हम और आप अपनी सेहत को लेकर काफी फिक्रमंद रहते हैं. बाजार से दाल, सब्जी या तेल खरीदते वक्त हमारी कोशिश येी होती है कि हम सबसे शुद्ध और ऑर्गेनिक चीज घर लाएं. लेकिन क्या आपको पता है कि बिना किसी पुख्ता नियम या पॉलिसी के, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) यानी प्रयोगशाला में जीन्स बदलकर तैयार की गई फसलें और खाद्य पदार्थ चुपके से हमारे बाजार और रसोई तक पहुंच रहे हैं?
इसी गंभीर मुद्दे को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने जीएम फसलों के मामले में दायर एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर जल्द सुनवाई करने का भरोसा दिया है.
Chief Justice सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस मामले को वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने उठाया. उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि ये सीधे तौर पर देश के करोड़ों लोगों की थाली और सेहत से जुड़ा मामला है.
अदालत में मामले को मेंशन करते हुए प्रशांत भूषण ने एक बेहद जरूरी बात कही. उन्होंने बताया कि इससे पहले जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ आदेश दिया था कि जब तक सरकार आनुवंशिक रूप से संशोधित यानी जीएम खाद्य पदार्थों को लेकर एक स्पष्ट और सुरक्षित राष्ट्रीय नीति (National Policy) नहीं बना लेती, तब तक इन्हें बाजार में नहीं लाया जा सकता.
इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर कई तरह के जीएम फूड प्रोडक्ट्स धड़ल्ले से बाजार में बेचे जा रहे हैं. इसी उल्लंघन को देखते हुए कोर्ट से इस अवमानना याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की गई है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है.
ये पूरा विवाद तब और गहरा गया था जब पर्यावरण मंत्रालय के तहत काम करने वाली देश की मुख्य नियामक संस्था ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी’ (GEAC) ने 18 अक्टूबर 2022 को जीएम सरसों (GM Mustard) की व्यावसायिक खेती की सिफारिश कर दी थी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया था. कोर्ट ने पूछा था कि जीएम फसलों की जैव-सुरक्षा (Bio-safety) की जांच के लिए अदालत ने जिस तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, उसकी रिपोर्ट और चेतावनियों को जीईएसी (GEAC) ने नजरअंदाज क्यों किया? ये याचिकाएं सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स और एनजीओ ‘जीन कैंपेन’ की तरफ से दायर की गई हैं, जो लंबे समय से सुरक्षित खान-पान की लड़ाई लड़ रहे हैं.
पिछले साल 23 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर एक विभाजित (Split) फैसला सुनाया था. उस वक्त भी अदालत ने साफ कहा था कि जीएम फसलों के अनुसंधान (Research), खेती, व्यापार और कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर एक व्यापक और पारदर्शी राष्ट्रीय नीति की सख्त जरूरत है.
एक आम भारतीय उपभोक्ता के नाते ये खबर हमारे लिए इसलिए मायने रखती है क्योंकि बिना किसी ठोस नीति और टेस्टिंग के जीएम फसलों का बाजार में आना हमारी सेहत, पर्यावरण और हमारे पारंपरिक किसानों के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ हो सकता है.
ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की कुलदीप सेंगर की जमानत, हाई कोर्ट से कहा- 2 महीने में करो फैसला
-भारत एक्सप्रेस
यूनिवर्सिटी एल्युमनाई की तर्ज़ पर अब गांव के बाशिंदे भी महानगरों में मनाएं अपनी मिट्टी…
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा 102 छात्र-छात्राओं को 'भगवान श्रीकृष्ण मेधावी…
राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी चर्चा में…
1 नवंबर से अयोध्या के राम मंदिर में श्रीरामलला की पूजा, आरती और दर्शन का…
NCB ने मिजोरम पुलिस और ED के साथ मिलकर 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' लॉन्च किया. असम, मिजोरम…
इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्ती के बाद मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सीधे CCTNS पोर्टल…