यासीन मलिक.
दिल्ली के राऊज एवेन्यु कोर्ट ने पाकिस्तानी फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यासीन मलिक सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दिया है. इससे पहले कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया था. यासीन मलिक सहित अन्य पर आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के जरिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से विदेशी फंडिंग ली थी.
आरोप है कि अपराध से 8, 94, 87, 639 रुपये की रकम जुताई गई, बाद में आरोपियों को मिला. स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने मामले में पेश किए गए दस्तावेजी और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद है.
जांच एजेंसी का आरोप है कि यह पैसा विभिन्न माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचा, जिसके बाद इसे कथित तौर पर स्थानांतरित, छिपाया अपने कब्जे में रखा और अलग-अलग गैरकानूनी गतिविधियों का इस्तेमाल किया गया. यासीन मलिक के अलावा जिन अन्य प्रमुख आरोपियों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें कश्मीरी कारोबारी जहूर अहमद शाह वताली, इंजीनियर अब्दुल रसीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और टायसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
ईडी ने अपराध से अर्जित रकम की जांच के लिए 14 जून 2017 को शिकायत दर्ज किया था.
बता दें कि एनआईए ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि ओसामा बिन लादेन के तर्ज पर यासीन मलिक को फांसी की सजा होनी चाहिए. इससे पहले 11 जुलाई को हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित शर्मा ने मामले से खुद को अलग कर लिया था. क्योंकि वो एनआईए की तरफ से 2010 में बतौर अभियोजक के तौर पर पेश हो चुके है. जिसके बाद मामले को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया था.
पिछली सुनवाई में एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यासीन मलिक ने फांसी की सजा से बचने के लिए बड़ी चालाकी से अपना अपराध कबूल कर लिया और अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी जबकि उसके खिलाफ इस तरह का अपराध है जिसके तहत फांसी की सजा होती है. इस तरह से कोई आतंकवादी वारदात कर गुनाह कबूल कर लेगा और फांसी की सजा से बच जाएगा.
बता दें कि 25 मई 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या और टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने यासीन मलिक पर यूपीए की धारा 17 के तहत आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये का जुर्माना जुर्माना लगाया था. 10 मई 2022 को यासीन मलिक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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