Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

यासीन मलिक की मुश्किलें बढ़ीं, मनी लॉन्ड्रिंग केस में चलेगा मुकदमा; राऊज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा आदेश

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पाकिस्तानी फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यासीन मलिक समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है.

Yaseen Malik

यासीन मलिक.

दिल्ली के राऊज एवेन्यु कोर्ट ने पाकिस्तानी फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यासीन मलिक सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दिया है. इससे पहले कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया था. यासीन मलिक सहित अन्य पर आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के जरिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से विदेशी फंडिंग ली थी.

आरोप है कि अपराध से 8, 94, 87, 639 रुपये की रकम जुताई गई, बाद में आरोपियों को मिला. स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने मामले में पेश किए गए दस्तावेजी और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद है.

यासीन मलिक समेत कई प्रमुख आरोपियों पर ईडी का शिकंजा

जांच एजेंसी का आरोप है कि यह पैसा विभिन्न माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचा, जिसके बाद इसे कथित तौर पर स्थानांतरित, छिपाया अपने कब्जे में रखा और अलग-अलग गैरकानूनी गतिविधियों का इस्तेमाल किया गया. यासीन मलिक के अलावा जिन अन्य प्रमुख आरोपियों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें कश्मीरी कारोबारी जहूर अहमद शाह वताली, इंजीनियर अब्दुल रसीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और टायसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

ईडी ने अपराध से अर्जित रकम की जांच के लिए 14 जून 2017 को शिकायत दर्ज किया था.

बता दें कि एनआईए ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि ओसामा बिन लादेन के तर्ज पर यासीन मलिक को फांसी की सजा होनी चाहिए. इससे पहले 11 जुलाई को हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित शर्मा ने मामले से खुद को अलग कर लिया था. क्योंकि वो एनआईए की तरफ से 2010 में बतौर अभियोजक के तौर पर पेश हो चुके है. जिसके बाद मामले को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया था.

10 मई 2022 को यासीन मलिक ने कबूला था अपना अपराध

पिछली सुनवाई में एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यासीन मलिक ने फांसी की सजा से बचने के लिए बड़ी चालाकी से अपना अपराध कबूल कर लिया और अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी जबकि उसके खिलाफ इस तरह का अपराध है जिसके तहत फांसी की सजा होती है. इस तरह से कोई आतंकवादी वारदात कर गुनाह कबूल कर लेगा और फांसी की सजा से बच जाएगा.

बता दें कि 25 मई 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हत्या और टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने यासीन मलिक पर यूपीए की धारा 17 के तहत आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये का जुर्माना जुर्माना लगाया था. 10 मई 2022 को यासीन मलिक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था.

यह भी पढ़ें: सौरभ गांगुली के पर्सनालिटी राइट्स मामले में नया मोड़: दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘दूसरा’ के मेकर्स को भेजा नोटिस

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital