धर्म

कहां हुआ था महावीर हनुमान का जन्म? दक्षिण के दो राज्यों में अलग-अलग तीन जगहों के दावे, क्‍या कहते हैं शास्त्रीय प्रमाण

सनातन धर्म में संकटमोचन हनुमानजी ऐसे देवता माने जाते हैं, जो कलयुग में भी सशरीर पृथ्वी पर मौजूद हैं. आज देश भर में करोड़ों श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महावीर हनुमान का जन्मस्थान वास्तव में कहां है? इस विषय पर देश के दो प्रमुख राज्यों (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक) और तीन अलग-अलग स्थानों के अपने-अपने दावे हैं. यह विवाद शास्त्रों और पौराणिक साक्ष्यों के आधार पर समय-समय पर चर्चा का विषय बनता रहा है. आइए विस्तार से समझते हैं कि हनुमानजी के जन्मस्थल को लेकर धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन मान्यताओं में क्या कहा गया है.

कर्नाटक का दावा: किष्किंधा और अंजनहल्ली

हनुमान जी के जन्मस्थान को लेकर पहला और सबसे मजबूत दावा कर्नाटक का माना जाता है. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, सुग्रीव का साम्राज्य ‘किष्किंधा’ आज के कर्नाटक में हम्पी (विजयनगर जिला) के पास स्थित है. यहां तुंगभद्रा नदी (जिसे शास्त्रों में पंपा सरोवर क्षेत्र कहा गया है) के तट पर ‘अंजनहल्ली’ (अंजनाद्रि पहाड़ी) स्थित है. कर्नाटक के संतों और विद्वानों का स्पष्ट तर्क है कि रामायण के भौगोलिक वर्णन के अनुसार माता अंजनी का निवास स्थान यही था, इसलिए हनुमान जी का जन्म इसी पावन पहाड़ी पर हुआ था.

आंध्र का दावा: तिरुमाला की अंजनाद्रि पहाड़ी

दूसरी तरफ, आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने एक बकायदा विद्वानों की समिति बनाकर यह दावा पेश किया था कि तिरुपति की सात पहाड़ियों में से एक, जिसका नाम ‘अंजनाद्रि‘ है, वही हनुमान जी की असली जन्मभूमि है. TTD के अनुसार, वराह पुराण और ब्रह्मांड पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि माता अंजनी ने भगवान शिव के अंश रूप में पुत्र प्राप्ति के लिए इसी पहाड़ी पर घोर तपस्या की थी. इस दावे के बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के धार्मिक विद्वानों के बीच लंबे समय तक शास्त्रों के प्रमाणों को लेकर बहस भी चली थी. इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक स्थित अंजनैरी पहाड़ी को लेकर भी एक स्थानीय दावा किया जाता है.

श्रीराम से पहले हुआ था हनुमान जी का जन्म?

सनातन कालक्रम के अनुसार, वर्तमान कलयुग से पहले द्वापर, त्रेता और सतयुग बीत चुके हैं. त्रेतायुग में भगवान श्रीराम का अवतार आज से लाखों वर्ष पूर्व हुआ था. वाल्मीकि रामायण और अन्य पुराणों के कालक्रम के अनुसार, हनुमान जी का जन्म भगवान श्रीराम के पृथ्वी पर अवतार लेने से कुछ समय पहले ही हो चुका था. इसके पीछे का शास्त्रीय कारण यह था कि जब भगवान विष्णु ने रावण के वध के लिए मानव रूप में जन्म लेने का निश्चय किया, तब ब्रह्मदेव के निर्देश पर सभी देवी-देवताओं ने वानर और भालू रूप में अपनी शक्तियों को पृथ्वी पर भेजा, ताकि वे आगे चलकर श्रीराम की सहायता कर सकें. इसी दिव्य योजना के तहत वायुदेव के अंश से महाबली हनुमान का जन्म माता अंजना के गर्भ से पहले ही हो गया था.

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महावीर हनुमान की असीम महिमा और बल

बजरंगबली को अतुलित बल का धाम माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार, वे भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं. बचपन में भूख लगने पर सूर्य को फल समझकर निगल लेने वाले हनुमान जी को इंद्र के वज्र से थोड़ी चोट अवश्य लगी थी, लेकिन उसके बाद ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवताओं ने उन्हें असीम वरदान दिए. वे ‘अष्टसिद्धि और नवनिधि’ के दाता हैं, जिससे वे अपना आकार एक मच्छर से लेकर विशाल पर्वत जितना बड़ा कर सकते हैं. उनके शरीर की बनावट वज्र के समान है, जिससे उनका एक नाम ‘बजरंगबली‘ (वज्र-अंग-बली) पड़ा.

हनुमान जी की महिमा और पूजा-विधि का सबसे सुंदर वर्णन गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के सुंदरकांड और लंकाकांड में मिलता है. इसके अलावा, ‘हनुमान चालीसा’ की 40 चौपाइयां आम लोगों के लिए संकट काटने का सबसे सरल मंत्र हैं. घोर संकट और शत्रुओं के नाश के लिए ‘बजरंग बाण’ का पाठ किया जाता है. वहीं, आनंद रामायण, अद्भुत रामायण और हनुमान अष्टक जैसी पवित्र पुस्तकों में भी उनके पराक्रम, जीवन चरित्र और ध्यान साधना की गूढ़ बातें विस्तार से बताई गई हैं.

अष्‍टचिरंजीवियों में से एक हैं महावीर हनुमान

शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी चिरंजीवी हैं, यानी वे आज भी धरती पर सशरीर विचरते हैं. जहां भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा होती है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप में जरूर उपस्थित रहते हैं. हनुमान चालीसा के अनुसार, उनका रंग कंचन (पिघले हुए सोने) जैसा चमकदार है, वे सुंदर वस्त्र और कानों में कुंडल धारण करते हैं. उनके एक हाथ में वज्र और गदा सुशोभित है, जबकि उनके कंधे पर मूंज का जनेऊ शोभा पाता है. उनका यह दिव्य और तेजस्वी रूप भक्तों के मन से हर प्रकार के भय को तुरंत दूर कर देता है.

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Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

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