आनंदेश्वर मंदिर, कानपुर
Sawan 2025: सावन के महीना धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. यह महीना बाबा भोलेनाथ को समर्पित होता है. शिव भक्त भी बाबा को प्रसन्न करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते. इसीलिए कांवड़िए गंगा जल लेकर दूर दूर तक शिवालयों में जाते हैं, वह काफी कष्ट सहते हुए बंब बंब भोले के नारों के साथ चलते हैं. जिससे उनकी ऊर्जा दोगुनी हो जाती है. कांवड़िए भी आनंदेश्वर मंदिर (Anandeshwar temple) में शिव की पूजा अर्चना कर रहे हैं.
कानपुर के परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर (Anandeshwar temple) में लाखों श्रद्धालु दर्शन पूजन कर रहे हैं. भीड़ को देखते हुए पुलिस और मंदिर प्रशासन ने भोलेनाथ के शयन, आरती और भोग के समय में कटौती की है. माना जाता है भगवान शंकर अपने भक्तों के लिए बहुत सहज और सरल है. इस मंदिर का संचालन सदियों से श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के साधु संत करते आ रहे हैं.
आनंदेश्वर मंदिर गंगा तट पर स्थित है . गंगा नदी मंदिर को छू कर गुजरती हैं. यहां का दृश्य देखते ही बनता है. आनंदेश्वर मंदिर (Anandeshwar temple) महाभारत कालीन है. जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरिगिरि ने बताया कि दानवीर कर्ण शिवलिंग की यहां पूजा अर्चना करने आते थे. इस शिवलिंग की जानकारी सिर्फ कर्ण को थी. एक दिन आनंदी गाय ने उन्हें पूजा करते देख लिया. उसके बाद आनंदी गाय ने पूजा वाले स्थान पर अपना सब दूध छोड़ना शुरू कर दिया.
आनंदी गाय का एक स्थान पर रोजाना दूध छोड़ने को ग्रामीणों ने देख लिया. ग्रामीण यह सब देख काफी अचंभित हुए. उन्होंने भी जिज्ञासा वश इस स्थान की खुदाई शुरू कर दी. जमीन की खुदाई पर एक दिव्य शिवलिंग प्रकट हो गया. ग्रामीणों ने उत्साहित होकर भगवान शंकर के खूब जयकारे लगाए. इसके बाद उसी स्थान पर शिवलिंग को स्थापित कर दिया. आनंदी गाय के कारण ही मंदिर का नाम आनंदेश्वर पड़ा.
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सावन माह में आनंदेश्वर मंदिर(Anandeshwar temple) शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. इस बार भी प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आनंदेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने लगातार आ रहे है. भीड़ का दवाब देखते हुए एसीपी कर्नलगंज महेश कुमार ने जूना अखाड़े के संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि से बात की. इस वार्ता के उपरांत मानिंद लोगों और साधु संतो ने अपने सुझावों से महंत हारीगिरि को अवगत कराया. पुलिस और मंदिर प्रशासन की सहमति के बाद आरती, भोग और शयन के समय में कटौती की गई.
कानपुर पुलिस के मुताबिक पहले मंदिर बाबा भोलेनाथ के शयन के लिए 11 बजे से रात 2.30 बजे तक बंद होता था. अब शयन का समय रात 11 बजे से रात 12.50 किया गया है. आरती भी पहले सवा घंटे थी. अब आरती 45 मिनट में की जा रही है. इस व्यवस्था से भारी भीड़ के दवाब में कुछ राहत जरूर मिलती हुई दिख रही है.
मंदिर के बाहर काफी दूर तक बैरिकेटिंग्स भी लगाए गए हैं. सुरक्षा व्यवस्था के लिए कानपुर पुलिस के अलावा पीएसी और अन्य जनपदों से भी पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है. गर्भगृह में सेवादारों के साथ 4 जगह पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं. मंदिर के आने जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
पुलिस ने भी भारी भीड़ के कारण परमट क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है. परमट के आस पास रूट डाइवर्जन स्कीम भी लागू की गई है. इसके बावजूद भी परमट क्षेत्र में पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है. मंदिर के महंत अरुण भारती ने बताया कि भारी भीड़ जरूर है लेकिन व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं.
आनंदेश्वर मंदिर के भक्त देश विदेश तक फैले हुए हैं. सावन के महीने में दूर दूर से भक्त यहां शिव की पूजा अर्चना करने आते हैं. मान्यता है कि आनंदेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से भक्तों की मनोकामना जरूर पूरी होती है. लोगों कहना है कि अगर आनंदेश्वर महादेव प्रसन्न हो जाए तो भक्तों को मालामाल कर देते हैं.
महंत अरुण भारती कहते हैं कि यहां आने वाले शिवभक्त दिल खोलकर दान पुण्य करते हैं. ये दान पुन्य रुपए पैसे से लेकर सोना, चांदी रूप में किया जाता है. बहुत से भक्त तो अपनी कमाई का कुछ प्रतिशत निर्धारित कर देते हैं. बाबा भोले के चरणों में इसे अर्पित करते रहते हैं.
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–भारत एक्सप्रेस
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