भृगु ऋषि द्वारा स्थापित शिवलिंग
Sawan 2025: कुंभ नगरी प्रयागराज में एक ऐसा शिवलिंग है जिसे भृगु ऋषि (Bhrigu Rishi) ने स्थापित किया था. खास बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस शिवलिंग की पूजा अर्चना करने कई बार आ चुके हैं. इसके अलावा यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, बृजेश पाठक और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया अक्सर यहां शिवलिंग की पूजा अर्चना करने आते रहते हैं.
सावन के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में प्राचीन शिवलिंग की पूजा अर्चना करते हैं. मान्यता है कि शिवलिंग पर फल फूल, गंगा जल आदि अर्पित करने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.
संगमनगरी में भृगु ऋषि (Bhrigu Rishi) द्वारा स्थापित शिवलिंग कहां पर स्थापित है
प्रयाग में भृगु ऋषि(Bhrigu Rishi) द्वारा स्थापित शिवलिंग यमुना तट स्थित मौज़गिरी मंदिर (Maujgiri mandir) परिसर में स्थापित है. कहते हैं इसी स्थान पर भृगु ऋषि (Bhrigu Rishi ने दत्तात्रेय भगवान की पूजा अर्चना की थी और एक शिवलिंग भी स्थापित किया था. मौज़गिरी मंदिर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संतों का एक महत्वपूर्ण स्थान हैं.
प्रयागराज में होने वाली जूना अखाड़े के धार्मिक गतिविधियां यहीं से संचालित होती हैं. यहां अक्सर जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरिगिरि, वरिष्ठ सभापति महंत प्रेमगिरी और अन्य बड़े संत आते रहते हैं. यहीं से धार्मिक, सामाजिक कार्यों को संपादित करते है.
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ योगेश्वर तिवारी कर चुके हैं शोध
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ योगेश्वर तिवारी मौज गिरी मंदिर ( Maujgiri mandir) पर काफी शोध कर चुके हैं. उनके मुताबिक भृगु ऋषि (Bhrigu Rishi) के द्वारा स्थापित शिवलिंग काफी प्राचीन है. उन्होंने अपने शोध में एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी है. भगवान राम ऋषि भारद्वाज से आशीर्वाद लेकर मौज़गिरी घाट से यमुना पार कर चित्रकूट वनवास के लिए निकले थे. इन तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने एक शिलापट भी मंदिर में लगाया है.

यमुना तट स्थित मंदिर का नाम मौज़गिरी क्यों पड़ा
जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरी को मुताबिक इस जगह पर लाभ 500 वर्ष पूर्व सिद्ध बाबा मौज़गिरी रहते थे.वह काफी जप तप करते रहते थे. श्रीमहंत प्रेमगिरी बताते हैं कि एक बार मौज़गिरि बाबा ने भंडारा किया. भंडारे के दौरान घी खत्म हो गया. घी खत्म होने से भंडारे में कार्य बाधित हो गया. बाबा के भक्त चिंतिंत हो गए. उन्होंने बाबा से यह बात बताई. मौज़गिरी बाबा ने तुरंत अपने भक्तों से कहा कि 2 बाल्टी घी यमुना जी से ले आओ. भक्तों को कुछ अजीव लगा. बाबा उनके मन की बात को भांप गए. बाबा ने दुबारा कहा कि जाओ. भक्त 2 बाल्टी लेकर यमुना नदी के पास गए. उन्होंने जैसे ही यमुना में बाल्टियां डाली तो वह घी से लबालब भर गई. सभी लोग बाबा की माया देखकर अचरज में पड़ गए. भंडारा अच्छी तरह संपन्न हो गया. बाबा ने 2 बाल्टी घी बाजार से मंगाकर यमुना नदी में डलवा दिया.

महंत प्रेमगिरि कहते हैं कि मौज़गिरि बाबा एक दिव्य संत थे. उनके अनुसार बाबा मौज़गिरि की समाधि आज भी जीवंत है. बाबा की समाधि पर जो भी भक्त दही पेड़ा अर्पित करता है. उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. मौज़गिरी मंदिर के महंत मुन्ना गिरि कहते हैं कि बाबा को दही पेड़ा बेहद पसंद था.
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कुंभ मेले के दौरान मौज़गिरि मंदिर से जूना अखाड़े की धार्मिक गतिविधियां होती हैं संचालित
कुंभ मेले और मुख्य पर्वों के दौरान जूना अखाड़े के काफी महत्वपूर्ण आयोजन मौज़गिरि मंदिर (Maujgiri Mandir) से संचालित होते हैं. जूना अखाड़े की पेशवाई भी इसी मंदिर से शुरू होती है. पेशवाई का मतलब कुंभ मेला छावनी में साधु संतों का प्रवेश. पेशवाई के दौरान मौज़गिरि मंदिर में साधु संत दत्तात्रेय भगवान और भृगु ऋषि द्वारा शिवलिंग का आशीर्वाद लेते हैं. इसके बाद संत अपने ईष्ट देवता दत्तात्रेय भगवान की प्रतिमा लेकर निकल पड़ते हैं. साधु संत पैदल और रथों पर बैठकर निकलते हैं.नागा साधु अपने अस्त्र शस्त्र के साथ प्रदर्शन करते हुए इन रथों के आगे आगे चलते हैं. जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज भी एक बड़े रथ से पेशवाई में शामिल रहते हैं.
पेशवाई में हाथी, घोड़े, बैंड बाजे और हजारों साधु संतों का एक विशाल जूलूस निकलता है. यह जुलूस मौज़गिरि मंदिर से शुरू होकर कुंभ मेले में खत्म होता है. अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरिगिरि की पेशवाई में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. कुंभ मेले के डीएम और एसएसपी फूल मालाओं के साथ संतों का मेला क्षेत्र में स्वागत करते हैं.
जूना अखाड़े की दत्तात्रेय समिति द्वारा देव दीपावाली पर्व पर मौज़गिरि यमुना घाट पर हजारों दीए जलाकर यमुना माता की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है. जूना अखाड़ा इस दिन घाट पर एक भजन संध्या भी आयोजित करता है. इसके बाद मंदिर में एक विशाल भंडारा भी होता है जिसमें हजारों की संख्या में लोग भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं.
मंदिर में मौज़गिरि बाबा की समाधि के समीप बालक बाबा की जीवंत समाधि भी मौजूद है. जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हारीगिरी कहते हैं कि बालक बाबा को काफी सिद्धियां प्राप्त थीं. उन्होंने छोटी सी उम्र में ही कई बड़े चमत्कार कर लोगों को अचंभित कर दिया था.
मंदिर परिसर में है शिव को समर्पित 150 फीट का त्रिशूल
मौज़गिरि मंदिर में भगवान शिव को समर्पित 140 फीट ऊंचा त्रिशूल भी मौजूद है. इस त्रिशूल को जूना अखाड़े ने कुंभ मेला 2019 के दौरान लगाया था. त्रिशूल लगने के बाद इसकी सर्वप्रथम पूजा अर्चना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी. उनके साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य भी थे . यह त्रिशूल 60 फीट जमीन के नीचे भी है जिससे इसकी मजबूती बनी रहे. केंद्रीय गृह अमित शाह ने भी विशालकाय त्रिशूल लगाने को लेकर जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरिगिरी के प्रयासों की सराहना की थी.

जूना अखाड़े ने यह त्रिशूल पूना की एक बड़ी कंपनी से बनवाया था. यह त्रिशूल पूना से 2 बड़े व लंबे ट्रकों से मौज़गिरी मंदिर 2019 में आया था. इसके बाद इसको लगाया गया. मंदिर का यह त्रिशूल काफी दूर से दिखाई पड़ता है. यमुना के नए पुल से अक्सर लोग इस त्रिशूल की फोटो लेते हुए दिख जाते हैं. मौज़गिरि मंदिर भगवान शिव की पूजा अर्चना का एक बड़ा केंद्र है.

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