Ayodhya: श्रीरामनगरी अयोध्या में राम मंदिर का बहुप्रतीक्षित निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया कि राम मंदिर परकोटे का निर्माण इस वर्ष 5 जून तक पूरा कर लिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि मुख्य मंदिर का गर्भगृह और मुख्य संरचना पहले ही तैयार हो चुकी है, और अब केवल परिसर के भीतर के अन्य मंदिरों और सजावटी कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण समिति के अध्यक्ष का ताजा बयान मंदिर निर्माण प्रक्रिया के ऐतिहासिक पड़ाव की ओर संकेत करता है, जिसका शुभारंभ 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नींव रखे जाने के साथ हुआ था.
मंगलवार सुबह अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब 42 फुट ऊंचा ध्वज दंड मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित किया गया. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि ध्वज दंड की स्थापना प्रक्रिया प्रातः 6:30 बजे शुरू हुई और डेढ़ घंटे के भीतर धार्मिक विधियों के साथ पूरी की गई. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना की गई.
यह ध्वज दंड मंदिर की भव्यता का प्रतीक बनेगा और इसे विशेष रूप से मंदिर की पवित्रता और स्थापत्य के अनुरूप डिजाइन किया गया है. मंदिर निर्माण से जुड़ी इंजीनियरों और कारीगरों की टीम ने दिन-रात मेहनत करके इसे स्थापित किया है, जो कई किलोमीटर दूर से नजर आएगा.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि 5 जून को न केवल मुख्य राम मंदिर का कार्य पूरा हो जाएगा, बल्कि मंदिर परिसर में स्थित अन्य छह मंदिरों की पूजा भी उसी दिन की जाएगी.
इन छह मंदिरों में महर्षि वाल्मीकि, श्री वशिष्ठ जी, माता अहिल्या, निषादराज महाराज, शबरी माता और अगस्त्य मुनि के मंदिर शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण पूर्ण होने के एक-दो दिन बाद भक्तगण इन सभी मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे.
नृपेंद्र मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि राम मंदिर का सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और नेतृत्व में साकार हुआ है. उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां आईं, लेकिन टीमवर्क और ट्रस्ट के सहयोग से सभी समस्याओं का समाधान निकाला गया.
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 1000 वर्षों तक किसी भी प्राकृतिक आपदा का सामना कर सके. इसके लिए विश्व स्तरीय इंजीनियरिंग और मजबूत नींव पर ध्यान दिया गया है.
राम मंदिर का निर्माण कार्य 2020 में शुरू हुआ था. 22 जनवरी 2024 को गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ मंदिर का औपचारिक उद्घाटन हुआ था, जिसके बाद से श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन हेतु आने लगे. हालांकि, मंदिर परिसर का विस्तृत कार्य अभी भी जारी था, जो अब 5 जून 2025 तक पूरा होने जा रहा है.
इस मंदिर का निर्माण भारतीय आस्था, संस्कृति और शिल्पकला का संगम है. न केवल यह धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह भारत की सनातन परंपरा और इतिहास का प्रतीक भी है.
राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं भी तैयार की जा रही हैं. इनमें दर्शन, लाइन प्रबंधन, प्रसाद वितरण, जलपान क्षेत्र, और डिजिटल सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
मंदिर ट्रस्ट द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आने वाले वर्षों में यह स्थान आध्यात्मिक पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बने. चंपत राय ने कहा कि 5 जून को होने वाले कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी.
राम मंदिर का निर्माण न केवल भारत के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह आधुनिक भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मबल का प्रतीक भी है. 5 जून 2025 को मंदिर निर्माण की पूर्णता एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन और नए युग की शुरुआत होगी. प्रधानमंत्री के नेतृत्व, टीम के समर्पण और जनता की आस्था ने इस सपने को साकार कर दिखाया है.
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