आस्था

क्यों मनाई जाती है बकरीद? जानिए कुर्बानी का महत्व और ईद-उल-अजहा का संदेश

Bakrid significance and history: Eid al-Adha जिसे हिंदी में बकरीद कहा जाता है, बकरीद मुसलमानों के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार कुर्बानी (बलिदान) की भावना को याद करने के लिए मनाया जाता है. इसका संबंध हजरत इब्राहीम और उनके बेटे फरजंद इब्राहीम की कहानी से है. इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहीम की परीक्षा ली और उनसे अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने को कहा. इब्राहीम अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए, क्योंकि वे अल्लाह के आदेश का पालन करना चाहते थे. उनकी सच्ची निष्ठा देखकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली.

कुर्बानी का विशेष महत्व

Eid al-Adha, जिसे आम भाषा में बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है. यह त्योहार त्याग, आस्था, प्रेम और मानवता का प्रतीक माना जाता है. बकरीद इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ज़िलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है. इसी समय हज भी संपन्न होता है. बकरीद मनाने के पीछे एक धार्मिक कथा जुड़ी हुई है, इस्लामी मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहीम अल्लाह के अत्यंत भक्त थे. अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी मांगी. हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने पुत्र की कुर्बानी देने का निश्चय किया. जब वे ऐसा करने लगे, तब अल्लाह ने उनकी सच्ची श्रद्धा और आज्ञाकारिता देखकर उनके पुत्र को सुरक्षित कर दिया और उसकी जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली. तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा.

यह भी पढ़ें: घर पर दस मिनट में बनाएं मैगी मसाला, याद कर लें आसान रेसिपी; भूल जाएंगे बाजार का स्वाद

त्याग, आस्था, प्रेम और मानवता का प्रतीक है बकरीद

इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्याग और समर्पण की भावना सिखाना है. बकरीद हमें यह संदेश देती है कि ईश्वर के प्रति सच्ची निष्ठा और मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है. इस दिन मुसलमान नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी देते हैं और अपने परिवार, मित्रों तथा गरीबों के साथ खुशियां बांटते हैं. कुर्बानी के मांस को तीन भागों में बांटने की परंपरा है- एक भाग परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और मित्रों के लिए तथा तीसरा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए. इससे समाज में समानता, भाईचारा और दया की भावना बढ़ती है.

बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता का भी प्रतीक है. यह हमें दूसरों की सहायता करने, जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति रखने और अपने स्वार्थ का त्याग करने की प्रेरणा देती है। इसलिए बकरीद का महत्व केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक माना जाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

Recent Posts

पल्लवी पटेल की सियासत: सामाजिक न्याय, जातिगत प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं की पहुंच की पूरी कहानी

Pallavi Patel Social Justice Politics: पल्लवी पटेल की राजनीति उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के…

2 minutes ago

7 जीत, अपनी पार्टी और सीबीआई से राहत: कुंडा में कैसे चलता है राजा भैया का एकछत्र राज?

UP Politics; लगातार 7 जीत, निर्दलीय से अपनी पार्टी का सफर और सीबीआई कोर्ट से…

8 minutes ago

द ट्रेजरी के रखवाले: सुरेश खन्ना ने कैसे तैयार किया यूपी का ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमिक ब्लूप्रिंट?

उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की रणनीति में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, MSME,…

27 minutes ago

अस्पतालों के औचक निरीक्षण से सख्त फैसलों तक: जानिए बृजेश पाठक के ‘हेल्थ मॉडल’ के 5 बड़े बदलाव

UP Budget 2026-27: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के स्वास्थ्य सुधारों का ध्यान अस्पतालों के निरीक्षण, बुनियादी…

30 minutes ago

भीम आर्मी से सांसद बनने की पूरी कहानी: हाथ में संविधान लेकर युवाओं की सबसे बड़ी ताकत कैसे बने चंद्रशेखर?

Western UP Politics: चंद्रशेखर आजाद ने संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, गरिमा, जमीनी सक्रियता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व…

44 minutes ago

बुढ़ापे की पैसों की चिंता खत्म! छोटे व्यापारियों के लिए सरकार की शानदार पेंशन योजना, हर महीने मिलेंगे 3,000 रुपये

छोटे दुकानदारों और स्व-रोजगार से जुड़े लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए…

49 minutes ago