Chandrika Devi Mandir Lucknow
Chandrika Devi : राजधानी लखनऊ के बक्शी का तालाब क्षेत्र में स्थित चंद्रिका देवी मंदिर को लखनऊ की कुलदेवी का दर्जा प्राप्त है। मान्यता है कि शहर में चाहे कोई आम व्यक्ति हो या खास, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले चंद्रिका देवी के दर्शन से ही की जाती है. इस प्राचीन मंदिर की स्थापना कब हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है. यहां के पुजारी राम आसरे वाजपेई बताते हैं कि देवी मां यहां स्वयं प्रकट हुई थीं. कहा जाता है कि पहले यहां एक नीम का खोखला पेड़ था और उसी खोखले पेड़ से देवी मां प्रकट हुईं. इस स्थान पर दुर्गा जी की 9 पिंडियां विराजमान हैं, जिनके दर्शन करने नवरात्रि में भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं.
नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इन्हीं नौ पिंडियों का दर्शन चंद्रिका देवी मंदिर में एक साथ होता है. इसी वजह से नवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. लखनऊ ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग यहां पहुंच रहे हैं . भक्त अपनी मनोकामनाएं यहां रखते हैं और जब इच्छाएं पूरी होती हैं तो ढोल बजवाकर देवी मां का आभार जताते हैं.
इस मंदिर में एक और विशेष परंपरा प्रचलित है. यहां बच्चों का मुंडन संस्कार करवाने की मान्यता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी अपने बच्चों का मुंडन यहां करवाता है, वह बच्चा बीमारियों से दूर और स्वस्थ जीवन जीता है. इस विश्वास के चलते सालभर लोग अपने बच्चों को यहां लाते हैं और परंपरा निभाते हैं.
Chandrika Devi मंदिर परिसर में हवन कुंड भी बना हुआ है. श्रद्धालु यहां नियमित रूप से हवन करते हैं और नवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं. मंदिर प्रबंधन और पुजारी बताते हैं कि इस पावन स्थल पर किए गए हवन और पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अपने परिवार के साथ या खुद हवन और विशेष अनुष्ठान करने के लिए मंदिर प्रशासन के पास काफी पहले से बुकिंग करानी पड़ती है जिससे श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो.
आजकल नवरात्रि के दौरान chandrika Devi मंदिर परिसर और आसपास का माहौल धार्मिक मेले जैसा है. प्रतिदिन करीब पांच हजार से अधिक भक्त दर्शन के लिए यहां पहुंच रहे हैं आम दिनों में भी मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी जाती हैं. चंद्रिका देवी मां के अलावा मंदिर में शिवलिंग और भैरव बाबा भी विराजमान हैं. श्रद्धालु इनकी भी पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. चंद्रिका देवी मंदिर के बाहर 1 किलोमीटर के दायरे में काफी दुकानें भी हैं जहां धार्मिक सामान, बच्चों के खिलौने, मिठाई और चाय की दुकानें आदि हैं जहां मंदिर आने वाले श्रद्धालु खरीददारी करने के साथ चाय आदि का भी आनंद लेते हैं.
नवरात्रि में Chandrika Devi मंदिर प्रातः 4 बजे से खुल जाता है और रात 10 बजे तक भक्तों के लिए दर्शन का अवसर उपलब्ध रहता है. वहीं, सामान्य दिनों में मंदिर सुबह 5 बजे से खुलता है और रात 10 बजे तक खुला रहता है. आरती का समय प्रायः सुबह 7 बजे होता है, लेकिन नवरात्रि में आरती सुबह 6 बजे कर दी जाती है जिसमें हजारों श्रद्धालुगण शामिलरहते है. शाम की आरती का समय रोजाना रात 8 बजे ही होता है.
Chandrika Devi मंदिर में फिलहाल ऑनलाइन दर्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। भक्तों को प्रत्यक्ष रूप से मंदिर में आकर ही दर्शन और पूजा करनी होती है. यही वजह है कि नवरात्रि में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है और पुलिस प्रशासन को भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं . मंदिर से काफी पहले बैरिकेटिंग की गई है और इसके आस पास वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है. श्रद्धालु अपने वाहनों को पार्किंग में खड़ा करके लगभग 1 किलोमीटर तक पैदल जाकर देवी के दर्शन करते हैं.
भारत एक्सप्रेस
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