Chaugan Madhiya Mandla Jawara Kalash Visarjan: मध्य प्रदेश के मंडला जिले का रामनगर क्षेत्र सोमवार को उस समय जयकारों से गूंज उठा, जब सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ ‘चौगान मढ़िया’ में स्थापित किए गए 4000 से अधिक जंवारा कलशों का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया. चैत्र नवरात्रि के पावन समापन पर आयोजित इस भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और देवी गीतों के बीच जब कलशों का कारवां निकलातो ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रकृति ने स्वयं श्रद्धा की हरी चादर ओढ़ ली हो. मां नर्मदा के पावन तट पर संपन्न हुए इस विसर्जन कार्यक्रम में विहंगम दृश्य देखने को मिला, जहां हर ओर केवल भक्ति, उत्साह और अटूट विश्वास का संगम नजर आ रहा था.
बता दें कि इस दिव्य आयोजन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र के तमाम दिग्गज आदिवासी नेता और जनसेवक शामिल हुए. प्रदेश की कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके, बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा, और पूर्व विधायक व जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले सहित कई जनप्रतिनिधियों ने चौगान मढ़िया में मत्था टेका और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की.
आदिवासी समाज की गहरी आस्था के केंद्र इस आयोजन में नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चौगान मढ़िया न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह गोंडवाना की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का एक मजबूत स्तंभ भी है.
दरअसल चौगान मढ़िया को प्रकृति शक्ति और देवी-देवताओं का अद्भुत मिलन स्थल माना जाता है. यहाँ प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँचते हैं. इस वर्ष 4000 से अधिक कलशों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि लोगों का इस शक्तिपीठ के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है. कई श्रद्धालु अपने कठिन संकल्पों और अनुष्ठानों की पूर्णता पर यहाँ कलश स्थापित करते हैं, जिनका विसर्जन रामनगर स्थित नर्मदा नदी के पवित्र जल में किया जाता है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह स्थल आदिवासी समाज की उन प्राचीन परंपराओं को सहेजे हुए है जहां प्रकृति को ही ईश्वर का साक्षात रूप मानकर पूजा जाता है.
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मेले जैसा माहौल और हजारों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे. विसर्जन मार्ग पर जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे और श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व विश्राम की व्यवस्था की गई थी. विसर्जन के दौरान सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच मां नर्मदा की आरती उतारी गई और फिर पूर्ण श्रद्धा के साथ कलशों को जल में प्रवाहित किया गया.
वहीं इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर मंडला जिले की उस गौरवशाली परंपरा को जीवंत कर दिया है, जहाँ आधुनिकता के दौर में भी लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का दीपक पूरी प्रखरता के साथ जल रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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