आस्था

Diwali 2025: महालक्ष्मी, श्री गणेश और देवी सरस्वती आज एक साथ पूजे जाएंगे, जानिए पूजा-पाठ से जुड़ी खास बातें

सनातन धर्म के अनुयायियों का सबसे बड़ा पर्व दीपावली आज मनाया जा रहा है, कार्तिक अमावस्या के दिन देवी लक्ष्मी के सागर मंथन से प्रकट होने के उपलक्ष्य में उनकी पूजा का यह विशेष दिन है. इस दिन न केवल धन की देवी महालक्ष्मी की आराधना होती है, बल्कि उनके साथ भगवान गणेश और देवी सरस्वती की भी पूजा की जाती है. इन तीनों देवी-देवताओं की एक साथ पूजा का गहरा अर्थ है, जो जीवन में संतुलन और समृद्धि के लिए आवश्यक है.

धन, बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक तीनों देव

महालक्ष्मी को धन, समृद्धि और वैभव की देवी माना जाता है, जो भौतिक सुख और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करती हैं. वहीं, भगवान गणेश बुद्धि के देवता, विघ्नविनाशक और किसी भी कार्य के सफल शुभारंभ के लिए पूजे जाते हैं. देवी सरस्वती ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की अधिष्ठात्री हैं.

दीपावली के अवसर पर इन तीनों की एक साथ पूजा इस मौलिक सिद्धांत को दर्शाती है कि जीवन में धन (महालक्ष्मी), बुद्धि (गणेश) और ज्ञान (सरस्वती) का सही तालमेल अत्यंत आवश्यक है. केवल धन कमाना पर्याप्त नहीं है; उस धन का सही उपयोग और प्रबंधन करने के लिए विवेकपूर्ण बुद्धि और सही-गलत का ज्ञान होना अनिवार्य है. यह संतुलन ही व्यक्ति के जीवन में वास्तविक सुख-समृद्धि लाता है.

केवल धन से नहीं मिलती सुख-शांति

शास्त्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि जीवन में केवल भौतिक धन से ही वास्तविक सुख-शांति प्राप्त नहीं हो सकती. धन का सही नियोजन और उसका विवेकपूर्ण प्रयोग गणेश रूपी बुद्धि के बिना संभव नहीं है. साथ ही, ज्ञान (सरस्वती) ही हमें सही निर्णय लेने और जीवन के उच्चतर लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है. ज्ञान और बुद्धि के अभाव में, धन लोभ, अनियंत्रण और अधर्म की ओर ले जा सकता है.

महाभारत में भी भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यही सीख दी थी कि केवल धन ही नहीं, बल्कि ज्ञान और धर्म के अनुसार किए गए कर्म ही ‘पुरुषार्थ’ हैं, और यही पुरुषार्थ धन की प्राप्ति का वास्तविक आधार है. इसलिए, दीपावली पर महालक्ष्मी की पूजा में गणेश और सरस्वती को भी शामिल किया जाता है.

महालक्ष्मी की पूजा भगवान विष्णु के साथ भी

देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं. शास्त्रों में मान्यता है कि जो भक्त लक्ष्मी जी के साथ उनके पति भगवान विष्णु की भी पूजा करते हैं, उन्हें देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान विष्णु ‘पुरुषार्थ’ के प्रतीक हैं और जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन स्थापित करते हैं.

विष्णु पुराण में विष्णु और लक्ष्मी के संयुक्त पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. यह संयुक्त आराधना जीवन में धन, ज्ञान, बुद्धि और पुरुषार्थ इन चारों की प्राप्ति का माध्यम बनती है. इसलिए दीपावली पर महालक्ष्मी, गणेश और सरस्वती के साथ भगवान विष्णु का पूजन भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. इस प्रकार, दीपावली की पूजा हमें सिखाती है कि भौतिक समृद्धि तभी सार्थक है जब वह ज्ञान और बुद्धि के अनुशासन में हो.

यह भी पढ़िए: Diwali 2025: इस दिवाली घर पर बनाए ये रंगोली डिजाइन्स, दिवाली की रौनक में लगाए चार चांद

Also Follow Bharat Express on Youtube

Bharat Express Desk

Recent Posts

म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामला: अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत, डिफॉल्ट जमानत मंजूर

म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को राऊज एवेन्यु कोर्ट…

1 minute ago

खबर पढ़कर रातों-रात PIL दाखिल करना सही नहीं, सुप्रीम कोर्ट की युवा वकील को नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दाखिल करने के तरीके पर नाराजगी जताई है. जस्टिस पी.एस.…

11 minutes ago

इबादत के बीच छाया खौफनाक अंधेरा! बारूदी धमाके के बाद अंधाधुंध फायरिंग, लहूलुहान हुआ पाकिस्तान

Pakistan News: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित कोहाट में शुक्रवार को ओल्ड पुलिस लाइंस के…

27 minutes ago

गणपति दर्शन के नाम पर अवैध वसूली, चंद्रपुर के इस चर्चित गणेश मंडल पर लगा बड़ा आरोप

महाराष्ट्र के चंद्रपुर स्थित जटपूरा वार्ड के 'चंद्रपुर चा राजा' गणेश मंडल से जुड़ा एक…

31 minutes ago

ममता के घास-फूल फ्रीज: दोफाड़ TMC को चुनाव आयोग ने दिए नए नाम और सिंबल, किसे क्या मिला?

EC On TMC New Party Row: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस टीएमसी (TMC) के अंदरूनी…

40 minutes ago