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Ganesh Chaturthi 2025: इस पर्व पर गणपति को सिद्धि विनायक रूप में पूजने का विधान, जानें शुभ स्थापना मुहूर्त और पूजा का सही समय

Ganesh Chaturthi 2025: भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर हर साल गणेशोत्सव की धूम रहती है. इस बार गणेश चतुर्थी बुधवार, 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी. देशभर में घरों से लेकर मंदिरों और भव्य पंडालों तक, हर जगह गणपति बप्पा का स्वागत बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ होगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए पूजा-अर्चना की जाती है.

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 27 अगस्त को गणपति स्थापना का सबसे उपयुक्त समय सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा. यह समय विशेष रूप से शुभ माना गया है. इसके बाद 12:22 बजे से 1:59 बजे तक राहुकाल रहेगा. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि स्थापना शुभ मुहूर्त में शुरू कर दी जाए, तो पूजा राहुकाल के दौरान भी जारी रखी जा सकती है.

इसके अतिरिक्त, शुभ चौघड़िया मुहूर्त सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा, जबकि अमृत चौघड़िया सुबह 7:33 से 9:09 बजे तक शुभ समय प्रदान करेगा. हालांकि इस बार अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, जो सामान्यतः अत्यंत मंगलकारी माना जाता है.

चतुर्थी तिथि का समय

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 26 अगस्त 2025 को दोपहर 1:54 बजे होगा और इसका समापन 27 अगस्त 2025 को दोपहर 3:44 बजे पर होगा. इसी अवधि में गणपति स्थापना और पूजा का महत्व है.

27 अगस्त 2025 का पूरा पंचांग

  • सूर्योदय: सुबह 05:56 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 06:48 बजे
  • चंद्रोदय: सुबह 09:28 बजे
  • चंद्रास्त: रात 08:56 बजे
  • चंद्र राशि: कन्या (रात 07:22 बजे तक), इसके बाद तुला में प्रवेश
  • शक संवत्सर: 1947
  • विक्रम संवत्सर: 2082
  • कली संवत्सर: 5126
  • ऋतु: शरद

चौघड़िया और अशुभ समय

  • अमृत चौघड़िया: सुबह 07:33 – 09:09
  • शुभ चौघड़िया: 10:46 – 12:22
  • लाभ चौघड़िया: 15:35 – 17:11
  • राहुकाल: 12:22 – 13:59
  • यमगण्ड काल: 07:32 – 09:09
  • गुलिक काल: 10:45 – 12:21

इस दिन जिन राशियों को चंद्रबल प्राप्त होगा, वे हैं — मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन. वहीं, नक्षत्रों में अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और उत्तराभाद्रपद को ताराबल मिलेगा.

क्यों खास है गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पर्व भी है. महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में तो यह त्योहार कई दिनों तक चलता है, जहां पंडालों में भव्य आयोजन होते हैं और गणपति बप्पा का दर्शन करने लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं. इस बार चतुर्थी का दिन बुधवार को पड़ रहा है, जो स्वयं गणेश जी का प्रिय वार माना जाता है. ऐसे में इस दिन की पूजा और भी फलदायी मानी जा रही है.

ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2025: जयपुर का ऐतिहासिक मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जहां उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

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