Shri Dudheshwar Nath temple, Ghaziabad
Sawan 2025: सावन के महीने की शिवरात्रि के अवसर पर सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर (Shri Dudheshwar Nath temple) में हजारों कांवड़ियों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया. शिवभक्तों की सुबह से ही लंबी लंबी कतारें लग गई थीं. श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से भरे शिवभक्त पूरे वातावरण को शिवमय बना रहे थे. कांवड़िए बोल बंब के जयकारे लगाते शिवलिंग की पूजा अर्चना कर रहे हैं . भोर से ही कांवड़िए अपनी पारंपरिक भेषभूषा में ढोल नगाड़ों के साथ हर हर महादेव के नारों के साथ हजारों की संख्या में पहुंच रहे हैं. मंदिर प्रशासन ने भी कावंड़ियों के स्वागत और दर्शन पूजन की विशेष व्यवस्था की है.
श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाध्वीसर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत मंडल के अध्यक्ष महंत नारायण गिरि ने दूधेश्वरनाथ महादेव का विशेष पूजन कर देशवासियों के लिए सुख समृद्धि और विश्व शांति की प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि सावन का महीना शिवभक्तों के लिए काफी पुण्यदायक रहता है. साथ ही यह देखकर खुशी है कि आजकल की युवा पीढ़ी आस्था और सनातन की परंपराओं से जुड़ रही है.
मंदिर प्रशासन की ओर से कावंड़ियों के लिए जलपान, स्वास्थ्य शिविर, शीतल पेय जल की समुचित व्यवस्था की गई है.
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3 दिन पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर (Shri Dudheshwar Nath temple) आए थे और उन्होंने शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हुए विधिवत पूजा अर्चना की थी. योगी आदित्यनाथ अक्सर दूधेश्वर मंदिर आते रहते हैं.
Shri Dudheshwar Nath temple का इतिहास रावण काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने दूधेश्वर मंदिर में भगवान शिव की घोर तपस्या की थी. भगवान भोलेनाथ उससे प्रसन्न भी हो गए थे.
मान्यता है कि दूधेश्वर नाथ मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है. भगवान शंकर शिवलिंग के रूप में खुद प्रकट हुए थे. मंदिर से दूध की कथा भी जुड़ी हुई है. कहा जाता है जब चरवाहे गाय लेकर इस स्थान से गुजरते थे तब गाय के थनों से दूध खुद गिरने लगता था. इसीलिए मंदिर का नाम दूधेश्वर पड़ा.
मंदिर का जीर्णोद्वार भी कई बार हो चुका है. छत्रपति शिवाजी महाराज भी दूधेश्वर नाथ मंदिर के भक्त थे, उन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्वार कराया था. कुछ सालों पहले समाजसेवी धर्मपाल गर्ग ने भी मंदिर का पूरे तन मन धन से जीर्णोद्वार कराया, वह भी दूधेश्वर नाथ मंदिर के परम भक्त हैं. यह मंदिर कई ऋषियों और सिद्ध महंतो की तपोस्थली रहा है, इसीलिए यहां आने वाले भक्तों को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलता है और उनकी मनोकामना भी पूरी होती है.
शिवरात्रि के मौके पर दूधेश्वर मंदिर में भारी भीड़ है और मंदिर के आने जाने वाले रास्तों में पुलिस ने वाहनों को प्रतिबंधित किया है. मंदिर परिसर को सीसी टीवी की निगरानी में रखा गया है जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन कराया जा सके. गाजियाबाद स्थित यह पवित्र धाम NCR का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं.
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि सहित देश के बड़े बड़े संत मन्दिर में आते रहते हैं. श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के काफी महत्वपूर्ण निर्णय भी यहीं से होते हैं. पीठाध्वीसर श्रीमहंत नारायण गिरि सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं. उन्होंने संस्कृत विषय के उत्थान के लिए बच्चों के लिए मंदिर परिसर में एक संस्कृत विद्यालय खोल रखा है. ये बच्चे मंदिर के छात्रावास में रहकर संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इनका खान पान रहने शिक्षा आदि का पूरा खर्च श्रीमहंत नारायणगिरि खुद वहन करते हैं. इस संस्कृत विद्यालय से शिक्षित छात्र आज देश भर में विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं.
इसके अलावा मंदिर परिसर में एक बड़ी गौशाला भी है जिसमें काफी संख्या में गाय हैं. महंत नारायणगिरि के दिशा निर्देश पर इनकी देखभाल की जाती है. महंत नारायण गिरि का कहना है कि गौसेवा जीवन की सबसे बड़ी सेवा है. इन गायों के के लिए पशु चिकित्सक भी रहते है. महंत नारायण गिरि लावारिस गायों की सेवा में भी जुटे रहते हैं. मंदिर में साल भर बड़े धार्मिक आयोजन भी चलते रहते हैं.
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–भारत एक्सप्रेस
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