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महाकाल की आंखों में बीकानेर की चमक! पिता-पुत्री ने तैयार किए ऐसे ‘शक्ति नेत्र’, जिनसे साक्षात देखते प्रतीत होते हैं महादेव

Mahakal Shakti Netra Bikaner: राजस्थान का बीकानेर एक बार फिर अपनी अनूठी कला और बारीक कारीगरी के चलते चर्चा में है. इस बार वजह बने हैं महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के श्रृंगार में लगाए गए विशेष शक्ति नेत्र, जिन्हें बीकानेर के कलाकार पिता-पुत्री की जोड़ी ने तैयार किया है.

बीकानेर के कलाकार वीरेंद्र साकरिया और उनकी पुत्री रुचि साकरिया द्वारा बनाए गए ये थ्री-डी रियलिस्टिक नेत्र अपनी जीवंतता के कारण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं. ‘गॉड आई’ के नाम से प्रसिद्ध इन नेत्रों में रेटीना इफेक्ट तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान की दृष्टि हर दिशा में बनी हुई है. वीरेंद्र साकरिया इससे पहले रामलला मंदिर के लिए भी विशेष नेत्र तैयार कर चुके हैं. इससे उनकी कला को राष्ट्रीय पहचान मिली है.

विशेष श्रृंगार में किया गया है नेत्रों का उपयोग

हाल ही में महाकाल मंदिर में हुए विशेष श्रृंगार में इन नेत्रों का उपयोग किया गया. जानकारी के अनुसार, अब तक छह बार महाकाल के लिए बीकानेर में बने नेत्र लगाए जा चुके हैं. चार इंच आकार के ये नेत्र चांदी में तैयार किए गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 13 हजार रुपए बताई जा रही है. इनका ऑर्डर पिछले वर्ष प्राप्त हुआ था, जिसके बाद इन्हें विशेष तकनीक के जरिए तैयार किया गया.

कला नहीं साधना जैसा अनुभव

कलाकार रुचि साकरिया ने बताया कि इन नेत्रों को बनाना केवल एक कला नहीं, बल्कि साधना जैसा अनुभव है. एक जोड़ी तैयार करने में लगभग 10 दिन का समय लगता है. हमने इस तकनीक को विकसित करने में एक साल से अधिक समय लगाया है, ताकि नेत्रों में वास्तविकता और भावनात्मक जुड़ाव दिखाई दे.

वहीं कलाकार वीरेंद्र साकरिया ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल नेत्र बनाना नहीं था, बल्कि ऐसा अनुभव देना था कि श्रद्धालु भगवान से सीधा जुड़ाव महसूस करें. जब आरती के समय रोशनी इन नेत्रों पर पड़ती है, तो लगता है जैसे भगवान स्वयं भक्तों को देख रहे हों. यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है.

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रियलिस्टिक लुक इन शक्ति नेत्रों की विशेषता

इन ‘शक्ति नेत्रों’ की सबसे बड़ी विशेषता इनका रियलिस्टिक लुक है. मंदिर में आरती के दौरान जब प्रकाश इन पर पड़ता है, तो भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं. यही कारण है कि अब इन नेत्रों की मांग देश ही नहीं, बल्कि मलेशिया, इंडोनेशिया और यूरोप तक पहुंच चुकी है.बीकानेर में तैयार ये अद्वितीय कारीगरी न केवल स्थानीय कलाकारों को नई पहचान दिला रही है, बल्कि इनकी कला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

-भारत एक्सप्रेस

नतांश पटेल

Crime and political journalist with 5+ years of experience, currently serving as Bureau In-Charge, Rajasthan at Bharat Express News Network. Known for leading editorial teams, delivering high-impact interviews, and driving audience growth through sharp content strategy.

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