Jagannath Temple Mystery: हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व है और इन्हीं में से एक प्रमुख धाम है ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर. यह पावन स्थल सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था, शक्ति और ऐसे अनसुलझे रहस्यों का केंद्र है जिसे देखकर आज की आधुनिक विज्ञान और बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी अपना सिर पकड़ लेते हैं. सुई की नोंक से लेकर आसमान की ऊंचाइयों तक इस मंदिर का हर कोना किसी न किसने चमत्कार से जुड़ा हुआ है. आइए विस्तार से जानते हैं जगन्नाथ धाम के उन 15 बड़े रहस्यों के बारे में जो सदियों से इंसानी दिमाग को हैरान कर रहे हैं.
आमतौर पर हवा जिस तरफ चलती है, कपड़ा उसी दिशा में उड़ता है. लेकिन जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा लाल ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. यह प्रकृति के नियमों को सीधी चुनौती देता है.
मंदिर के सबसे ऊपर अष्टधातु से बना सुदर्शन चक्र लगा है. इसकी इंजीनियरिंग ऐसी है कि आप पुरी के किसी भी कोने में खड़े होकर इसे देखें, आपको इसका मुख हमेशा अपने सामने ही दिखाई देगा. इसे प्राचीन भारतीय धातु विज्ञान का बेजोड़ नमूना भी माना जाता है क्योंकि सदियों से समुद्र की खारी हवा और भारी बारिश झेलने के बाद भी इस पर आज तक कभी जंग नहीं लगी है.
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार (सिंहद्वार) की अपनी एक अलग ही कहानी है. जैसे ही आप मंदिर के बाहर खड़े होते हैं, आपको समुद्र की लहरों की तेज आवाज सुनाई देती है. लेकिन जैसे ही आप सिंहद्वार के अंदर पहला कदम रखते हैं, वो आवाज अचानक गायब हो जाती है.
पुरी का यह विशाल मंदिर वास्तुकला की एक ऐसी मिसाल है, जिसे समझना नामुमकिन है. दिन के किसी भी पहर, चाहे सुबह हो या दोपहर, इस मुख्य मंदिर की परछाई कभी जमीन पर नहीं बनती. इसके अलावा सुबह और शाम के वक्त सूर्य की किरणें सीधे सिंहद्वार पर पड़ती हैं जो बेहद शुभ माना जाता है.
यहां भगवान के लिए 56 भोग तैयार किए जाते हैं. मंदिर की रसोई में एक के ऊपर एक सात मिट्टी के बर्तन रखे जाते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना बाद में पकता है, जबकि सबसे ऊपर रखे सातवें बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है. इसके अलावा, यहाँ चाहे लाखों भक्त आ जाएं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही कभी बर्बाद होता है.
हर 8, 11, 12 या 19 साल में एक बार यहां की मूर्तियां बदली जाती हैं. नई मूर्तियों के लिए नीम के खास पेड़ (दारु ब्रह्म) को खोजने की प्रक्रिया बेहद गुप्त होती है, जिसमें ज्योतिषीय गणना और गुप्त मंत्रों की मदद ली जाती है.
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स्थानीय लोगों का मानना है कि जब मंदिर के आसपास शंख बजाया जाता है, तो समुद्र की लहरें अपने आप शांत और धीमी हो जाती हैं. ऐसा लगता है मानो समंदर भी भगवान की भक्ति में लीन होकर शांत हो गया हो. वहीं मंदिर से दूर जाने पर यह आवाज फिर से तेज हो जाती है.
यह कोई आम परंपरा नहीं है. हर रोज एक पुजारी मंदिर के शिखर पर जो लगभग 45 मंजिल ऊंचा है, बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उल्टी दिशा में चढ़ता है और ध्वज बदलता है. मान्यता है कि अगर एक दिन भी ध्वज नहीं बदला गया तो मंदिर अगले 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा.
पुरी में मृत्यु को सीधा मोक्ष का द्वार माना जाता है. यहां सदियों से परंपरा है कि मरणासन्न (आखिरी सांसें ले रहे) व्यक्ति के मुंह में जगन्नाथ जी का महाप्रसाद डाला जाता है, ताकि उसकी आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिल सके.
जगन्नाथ धाम की अधिष्ठात्री शक्ति मां विमला देवी हैं. भगवान जगन्नाथ को लगने वाला भोग तब तक ‘महाप्रसाद’ नहीं बनता जब तक कि उसे सबसे पहले मां विमला देवी को अर्पित न किया जाए. उनके बिना यहां की पूजा अधूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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